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गुजरात: सर्वे में BJP की मुश्किलें बढ़ीं, मेनिफेस्टो की जगह विजन डॉक्युमेंट ला सकती है

गुजरात: सर्वे में BJP की मुश्किलें बढ़ीं, मेनिफेस्टो की जगह विजन डॉक्युमेंट ला सकती है

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by December 7, 2017 लखनऊ

नई दिल्ली: विधानसभा चुनाव में आंतरिक फीडबैक और सर्वे से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बीजेपी स्ट्रैटजी के तहत 28 नवंबर को घोषणा पत्र जारी करने वाली थी, लेकिन अब उसने इरादा बदल दिया है। ऐसा कहा जा रहा है कि वह मेनिफेस्टो की जगह गुरुवार या एक -दो दिन में विजन डॉक्युमेंट लाने पर विचार कर रही है। नरेंद्र मोदी इसे मंजूरी देंगे। प्रधानमंत्री अगर मंजूरी नहीं देते हैं तो बिना घोषणा पत्र के ही बीजेपी चुनाव लड़ेगी। बता दें कि कांग्रेस ने कुछ दिन पहले घोषणा पत्र जारी किया था, जिसमें किसानों को कई सुविधाएं देने की बात कही है।

  • बीजेपी ने अभी तक क्यों नहीं किया मेनिफेस्टो का एलान?

    – पहले फेज के चुनाव में अब दो बचे हैं। बीजेपी नेताओं का मानना है कि घोषणा पत्र में लुभावने वायदे, विकास के एजेंडे की बात होगी तो विपक्ष बीजेपी के 19 साल से सत्ता में होने की दलील देते हुए घेराबंदी कर सकती है।

    – दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में गुजरात में पाटीदारों को आरक्षण, पेट्रोल-डीजल के भाव में 10 रुपए कटौती, अल्पसंख्यक आयोग का गठन, यूनिवर्सल हेल्थ कार्ड जैसे लुभावने वायदे किए हैं।

    बीजेपी की मुश्किल ये है कि अगर वह अपना घोषणा पत्र लाती है तो उसे कांग्रेस से ज्यादा लुभावने वायदे वादे करने होंगे।

    2014 से अब तक 5 बार विजन डॉक्युमेंटजारी किया बीजेपी ने

    – बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मेनिफेस्टो जारी किया था। इसके बाद इसी साल हरियाणा-महाराष्ट्र चुनाव में घोषणा पत्र जारी किया था।

    – बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर, झारखंड, दिल्ली, असम और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में विजन डॉक्युमेंट जारी किया था।

    मेनिफेस्टो और विजन डॉक्युमेंट में क्या फर्क है?

    – राजनीतिक दल सत्ता पाने के बाद 5 साल में क्या-क्या काम करेंगे, वे इसके लिए एक एजेंडा जारी करते हैं। इसे ही मेनिफेस्टो कहा जाता है, जिसमें लुभावने वायदे, कई योजनाएं होती हैं।

    – विजन डॉक्युमेंट में 5 साल की समय सीमा नहीं होती। इतना ही नहीं, राज्य के लिए पार्टी की राय क्या है वह क्या करना चाहती है इसकी चर्चा होती है।

    मेनिफेस्टो के बारे में आयोग का निर्देश
    – 24 अप्रैल, 2015 को इलेक्शन कमीशन ने गाइडलाइंस जारी की थीं। दरअसल ईसी को यह इसलिए करना पड़ा क्योंकि तमिलनाडु असेंबली चुनाव में टीवी, सोने की चैन देने के वादे को चुनावी घोषणा पत्र में पार्टियों ने शामिल किया था।

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