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पार्टी नेता का दावा: कांग्रेस प्रेसिडेंट के लिए मुझे राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने से रोका गया

पार्टी नेता का दावा: कांग्रेस प्रेसिडेंट के लिए मुझे राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने से रोका गया

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by December 8, 2017 दिल्ली

 नई दिल्ली.यूपी के कांग्रेस नेता अयूब अली ने दावा किया है कि पार्टी के प्रेसिडेंट इलेक्शन में उन्हें राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने से रोका गया। अयूब ने गुरुवार को न्यूज एजेंसी से कहा, ”मैं कांग्रेस सेंट्रल इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरमैन एम. रामचंद्रन के पास गया था। उनसे कहा कि प्रेसिडेंट पोस्ट के लिए इलेक्शन लड़ना चाहता हूं। वह काफी गुस्से में बोले- यहां सिर्फ एक कैंडिडेट हैं राहुल जी। यहां से बाहर निकल जाओ।” नॉमिनेशन पेपर्स की स्क्रूटनी के बाद राहुल इकलौते वैलिड कैंडिडेट हैं। उन्होंने ने सोमवार को कांग्रेस हेडक्वार्टर में नॉमिनेशन फाइल किया था। अब 11 दिसंबर को 3 बजे नाम वापस लेने की समय सीमा खत्म होने के बाद राहुल के निर्विरोध चुने जाने का एलान होगा। वे इस पोस्ट पर पहुंचने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे शख्स होंगे।

  • – मंगलवार को स्क्रूटनी के बाद इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरमैन और रिटर्निंग ऑफिसर मुलापल्ली रामचंद्रन ने बताया कि कांग्रेस प्रेसिडेंट इलेक्शन के लिए कुल 89 नॉमिनेशन पेपर्स मिले, सभी में राहुल गांधी का नाम है। उन्होंने कहा कि स्क्रूटनी के दौरान सभी पेपर्स वैलिड पाए गए। प्रेसिडेंट पोस्ट के लिए इलेक्शन प्रॉसेस में अब सिर्फ एक वैलिड कैंडिडेट राहुल गांधी हैं।

    हर राज्य के 10-10 डेलिगेट्स से नॉमिनेशन पेपर्स मांगे गए

    – इसके पहले रविवार को पार्टी के सेंट्रल इलेक्शन अथॉरिटी चेयरमैन मुलापल्ली रामचंद्रन और इसके मेंबर मधुसूदन मिस्त्री ने प्रेसिडेंट के इलेक्शन से जुड़ी प्रॉसेस को लेकर पार्टी हेडक्वार्टर में मीटिंग की। इस दौरान राज्यों के रिटर्निंग ऑफिसर्स को इलेक्शन प्रॉसेस की जानकारी दी गई थी। सभी स्टेट यूनिट के 10 डेलिगेट्स को नॉमिनेशन पेपर्स का एक-एक सेट भेजने को कहा गया था, जिसमें राहुल गांधी को प्रेसिडेंट बनाए जाने का प्रस्ताव हो।

    राहुल गांधी की ताजपोशी तय

    – पार्टी प्रेसिडेंट इलेक्शन में राहुल अकेले वैलिड नॉमिनेटेड कैंडिडेट हैं। 11 दिसंबर को 3 बजे नाम वापस लेने का वक्त खत्म होने के बाद उनके निर्विरोध चुने जाने का एलान होगा।

    – इसके पहले 1 से 4 दिसंबर तक नामांकन भरने, 5 को स्क्रूटनी, एक से ज्यादा नॉमिनेशन होने पर 16 को वोटिंग और 19 को नतीजे जारी होने की तारीख तय की गई थी।

    राहुल सबसे मुश्किल दौर में बन रहे हैं पार्टी प्रेसिडेंट

    – राहुल अध्यक्ष पद संभालने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे और कांग्रेस के 60वें सदस्य होंगे। पार्टी में 7 साल बाद हो रहे चुनाव में वह मां सोनिया गांधी की जगह लेंगे। राहुल सबसे मुश्किल दौर में पार्टी प्रेसिडेंट बन रहे हैं। इस वक्त देश के महज 10% हिस्से में कांग्रेस का शासन रह गया है।

    – 1951 यानी जवाहरलाल नेहरू के वक्त देश के 90% हिस्से पर कांग्रेस का शासन था। तब कांग्रेस के पास लोकसभा की 489 में से 364 (74%) सीटें थीं। 1969 में इंदिरा गांधी के वक्त भी देश के 90% हिस्से पर कांग्रेस का शासन था। तब कांग्रेस के पास लोकसभा की 494 में से 371 (75%) सीटें थीं।

    – 1985 में राजीव गांधी के पीएम बनने के बाद कांग्रेस का देश के 67% हिस्से पर शासन था। उस वक्त कांग्रेस के पास लोकसभा की 542 में से 415 (77%) सीटें थीं। 1998 में सोनिया गांधी के पार्टी प्रेसिडेंट पोस्ट संभालने के वक्त कांग्रेस का देश के 19% इलाके पर शासन था। कांग्रेस के पास लोकसभा की 543 में से 141 (28%) सीटें थीं।

    – अब जब राहुल कांग्रेस के प्रेसिडेंट बनने जा रहे हैं, तब कांग्रेस के पास लोकसभा में 543 में से सिर्फ 46 (8%) सीटें हैं।ग्रेस में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने वाले राहुल तीसरे नेता हैं। उनसे पहले उपाध्यक्ष रहे दो नेताओं का पॉलिटिकल करियर ज्यादा ऊंचाई हासिल नहीं कर पाया। 1986 में अर्जुन सिंह और 1997 में जितेंद्र प्रसाद इस पद पर रहे थे, लेकिन दोनों किसी और ऊंचे मुकाम पर नहीं पहुंच पाए।

    कांग्रेस में 44 साल प्रेसिडेंट रहा नेहरू-गांधी परिवार

    – 132 साल में नेहरू-गांधी परिवार 44 साल अध्यक्ष रहा; इन 44 साल में से 25 साल मोतीलाल से राजीव गांधी तक कांग्रेस प्रेसिडेंट रहे।

    – परिवार में पं. नेहरू सबसे कम 40 साल की उम्र में तो सोनिया सबसे ज्यादा 52 की उम्र में अध्यक्ष बनीं। जनवरी, 2013 में कांग्रेस उपाध्यक्ष चुने गए थे राहुल, तब से कांग्रेस करीब 27 चुनावों में हारी।

    पार्टी के मुख्य संरक्षक की भूमिका ले सकती हैं सोनिया

    – सोनिया कांग्रेस में मुख्य संरक्षक की भमिूका में रह सकती हैं। पार्टी के नेशनल स्पोक्सपर्सन रणदीप सुरजेवाला ने 20 नवंबर को कहा था, “सोनिया जी हमारी नेता और मार्गदर्शक हैं। उनका कुशल नेतृत्व और दिशा-निर्देश हमेशा उपलब्ध रहेंगे।”

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