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एलजी साहब, चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन जाने के लिए दिलाएं रास्ता

एलजी साहब, चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन जाने के लिए दिलाएं रास्ता

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by December 10, 2017 दिल्ली

नई दिल्ली : चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन के बाहर रेहड़ी-पटरी वालों के अतिक्रमण के कारण आवाजाही का रास्ता न मिलने से परेशान यहां के दुकानदारों ने अब उपराज्यपाल अनिल बैजल से गुहार लगाई है। इससे पहले चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन के बाहर के रास्ते से अतिक्रमण हटाने को लेकर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) भी दिल्ली पुलिस को कुछ माह पहले पत्र लिख चुका है, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। इस बीच, उपराज्यपाल ने शनिवार को चांदनी चौक का दौरा किया और अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया। इससे यहां के दुकानदारों और मेट्रो यात्रियों को उपराज्यपाल से आस बंधी है।

इस बारे में चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय भार्गव ने कहा कि एलजी को पुलिस अधिकारियों और उत्तरी निगम के अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए तभी अतिक्रमण हट सकेगा। स्थिति यह कि फव्वारा चौक से आगे चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन जाने के संकरे रास्ते में 30 से अधिक रेहड़ी-पटरी की दुकानें लगी हुई हैं, जिसके कारण यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश और निकासी का रास्ता नहीं मिलता है। भीड़भाड़ में जेब कटने और छेड़छाड़ की घटनाएं आम है।

भगीरथ प्लेस इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत आहूजा के मुताबिक कुछ माह पहले नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने का अभियान भी चलाया था, लेकिन कुछ नेताओं और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से फिर यहां कब्जा हो गया है। दिल्ली मेट्रो के चांदनी चौक स्थित स्टेशनों के बाहर की हालत यह है कि गेट तक पर रेहड़ी पटरी वालों ने कब्जा जमा लिया है। आसपास के लोगों की मानें तो इनके अतिक्रमण में दिल्ली पुलिस व निगम अधिकारियों के साथ ही स्थानीय नेताओं का बड़ा योगदान है। इस कारण भी एलजी, हाई कोर्ट और केंद्रीय मंत्रियों की दिलचस्पी के बाद भी चांदनी चौक को अतिक्रमण से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। हाल ही में शुरू हुआ लाल किला मेट्रो स्टेशन भी अतिक्रमण की जद में आ गया है। यहां से लोडिंग-अनलोडिंग का काम धड़ल्ले से हो रहा है। चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन के बाहर अतिक्रमण हटाने को लेकर डीएमआरसी के मुख्य सुरक्षा आयुक्त एमएस उपाध्याय ने इसी वर्ष 5 अप्रैल को उत्तरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त जतिन नरवाल को पत्र लिखा था, लेकिन आठ माह बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं आया है।

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