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भीड़ द्वारा की जा रही हत्या पर सुप्रीम कोर्ट का सख़्त निर्देश

भीड़ द्वारा की जा रही हत्या पर सुप्रीम कोर्ट का सख़्त निर्देश

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नई दिल्ली। गो रक्षकों द्वारा निरीह लोंगों की पीट पीट कर की जा रही हत्या को तत्काल रोकने और हत्यारों के ख़िलाफ़ सख्त सजा का कानून बनाने के दिशा निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई नागरिक क़ानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। क़ानून व्यवस्था बनाये रखना राज्य सरकारों की ज़िम्मेदारी। भीड़ द्वारा की जा रही हत्या पर हो सख़्त सजा का प्रावधान। भीड़ द्वारा की जा रही हत्या को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस तरह का नया नियम नहीं बनने दिया जाएगा। संसद इस के लिए क़ानून बनाये और 4 हफ्ते में लागू करें।

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से सैकड़ों लोंगों को गो हत्यारा बता कर भीड़ ने हत्या कर दिया और सरकार चुपचाप देखती रहीं जिससे इस तरह का मामला और बढ़ता गया। यूपी के दादरी में सबसे दर्दनाक हादसा हुआ था जिसमें एखलाक नामक व्यक्ति को उसके घर में घुस भीड़ ने पीट पीट कर हत्या कर दिया। बताया गया कि उसके घर में गो मांस होने का अंदेशा था लेकिन बाद में जब अख़लाक़ के घर से बरामद मांस की जांच हुई तो वह बकरे का मीट निकला। इसी तरह राजेस्थान में पहलू खान को उस समय मार दिया गया जब वह दूध के लिए गाय खरीद कर लेकर जा रहे थे। हापुड़ में कासिम को लोंगों ने पीट पीट कर मार डाला।

इस तरह की जघन्य हत्या करने वालों को जहां कुछ कट्टरपंथी संगठनों द्वारा सम्मानित किया गया वहीं सरकार की तरफ से कभी भी गम्भीरता से नहीं लिया गया। जिसके कारण गो रक्षकों के हौसले बढ़ते गए और जनता में इनका आतंक।
भाजपा की सरकार बनने के बाद सरकार समर्थित कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने देश में आतंक का माहौल बनाया और अल्पसंख्यक समाज भय के वातावरण में जीवन व्यतीत करने लगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गो रक्षा के नाम इस तरह आतंक बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और न ही इस तरह नियम बनने दिया जाएगा।

हर नागरिक को अपनी ज़िंदगी जीने का अधिकार है। कौन क्या खा रहा है? कैसे रहता है यह फैसला जनता नही कर सकती है। अगर कोई अपराध करता है तो उसके लिए सरकार द्वारा कानून बनाया गया है। पुलिस और अदालतें हैं। जो अपना काम ज़िम्मेदारी के साथ कर रहे हैं।

कोर्ट के इस निर्देश से जनता में जिंदगी जीने का विश्वास बढ़ेगा और नागरिक अपने आपको सुरक्षित महसूस करेगा। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।

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