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मुनव्वर मेरी आँखों को शमशुद्दहा करदे…..

मुनव्वर मेरी आँखों को शमशुद्दहा करदे…..

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दिल्ली (सरताज आलम)।जुमे को जानशीन अख्तर रज़ा खां “अजहरी मियां” का लिखा यह कलाम उनके आखिरी दीदार को उमड़ी भीड़ में शामिल हर एक की ज़ुबाँ पर था। आपके जनाज़े की नमाज़ इतवार को सुबह 10 बजे इस्लामिया इंटर कॉलेज बरेली में अदा की जायेगी।

अजहरी मियां तालीम के बड़े हिमायती थे दुनिया में इस्लामिक शिक्षा की ऑक्सफोर्ड मानी जाने वाली मिस्र की “अल अजहर यूनिवर्सिटी” के 1966 में टॉपर रहे है और उन्हें मिस्र में “फख्र-ए-अजहर” के सम्मान से नवाजा गया और एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था के सर्वे में दुनिया भर के 500 प्रभावशाली मुस्लिम चेहरों में अजहरी मियां 24 वे स्थान पर थे आपने अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, अरबी में दर्जनों किताबें लिखी, स्वयं सऊदी हुकूमत ने अजहरी मियां को 2006 में काबे के अंदर तशरीफ ले जाने की इजाजत दी,आपने वहां पर नमाज अदा की।
आपने सैकड़ों किताबें लिखी, इस्लाम के साथ-साथ इंसानियत के बड़े हिमायती थे आप के उत्तर प्रदेश के बरेली में बनाए मदरसे में 18 छात्र रहन सहन के साथ ही मुफ्त शिक्षा पाते हैं
दुनिया भर में करोड़ों चाहने वालों के बीच आखिरी वक्त में ‘अल्लाह हू अकबर’ कहते हुए दुनिया को अलविदा कह गए
अजहरी मियां आला हजरत के परपोते थे अक्सर दुनिया भर के मुल्कों में आपको बुलाया जाता था अभी हाल ही में अफ्रीका आप गए थे एक झलक देखने के लिए लाखों लोग बेताब थे
आपके दुनिया से जाने की खबर सुनकर हिंदुस्तान समय विदेशों में आपके चाहने वाले गमजदा हैं अजहरी मियां इस्लाम के उसूलों के पाबन्द के साथ आतंकवाद और हिंसा के जबरदस्त खिलाफ थे सूफिज्म के हिमायती थे और इंसानियत के अलंबरदार।(Sartaj Alam) Facebook

 

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