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मुफ़्ती ए आज़म अख़्तर रजा अज़हरी के जनाजे में  पहुंचे लाखों मुरीद, व्यवस्था संभालने में लगी 30 ज़िलों की पुलिस

मुफ़्ती ए आज़म अख़्तर रजा अज़हरी के जनाजे में  पहुंचे लाखों मुरीद, व्यवस्था संभालने में लगी 30 ज़िलों की पुलिस

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बरेली (सरताज आलम)। जहां जहां तक खबर गई हजरत के चाहने वालों की भीड़ उमड़ने लगी बुज़ुर्ग, जवान,बच्चे और क्या बुरखा नशीन ख़वातीन सब अपने पीर के आखिरी दीदार की जुस्तजू लिए रो रहे थे। दुआएं कर रहे थे, कि एक नज़र अपने पीर को देख लें, बिना भूख प्यास की फ़िक्र किये। हर दिल में यही तमन्ना रही कि जनाज़े तक पहुंच जाएँ।

       आज बरेली में हज़रत अख्तर रज़ा खां के जनाज़े में लगभग 15 लाख लोगों ने शिरकत की,आज 10:30 बजे उनकी नमाज़ ए जनाज़ा अदा की गई।
क्या मुसलमान? क्या हिन्दू ? हर इंसान की आँखे नम थी, जीवन भर 4 करोड़ इंसानों को अपना मुरीद करके आप इंसानियत का पैगाम दिया। हर तरफ बस एक ही आवाज़ गूंज रही थी।

मेहमान ए काबा कौन बना तजुशशरिया तजुशशरिया। 

जनाज़े में शामिल हर शख्स ने अपने नायक को आखरी विदाई दी। खास तौर पर इस्लामिक शिक्षा की मिस्र की अल अजहर यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल अपने स्टूडेंट के आखरी दीदार के लिए तशरीफ़ लाए ,आए भी क्यों ना एशिया में सिर्फ अख्तर रज़ा खां ने ही मिस्र की इस्लामिक यूनिवर्सिटी टॉप की है।

इसलिए उन्हें मिस्र में फख्र ए अजहर के सम्मान से नवाज़ा गया था।
जॉर्डन की अंतरराष्ट्रीय सर्वे में 100 प्रभाव शाली शख्सियतों में 22 वें स्थान पर रहे। और जीवन भर सादा जिए ऊँचा जिए।
इस्लाम के उसूलों के साथ हर पल इंसानियत को आगे रखा। 

30 ज़िलों की पुलिस ने व्यवस्था सम्भाली….

अज़हरी मियां की मौत की खबर सुनते ही दुनियां भर से उनके मुरीदों के आने का सिलसिला शुक्रवार से ही शुरू होगया था। जिसके कारण पूरा बरेली शहर मुरीदों से खचाखच भर गया था। बरेली प्रशासन को व्यवस्था संभालना मुश्किल था इस लिए सरकार ने आसपास के 30 ज़िलों की पुलिस सहायता लिया जिससे व्यवस्था बनी रहे।

लाखों की संख्या में पहुंचे मुरीदों ने व्यवस्था खराब नहीं होने दिया। अमन और शांति का सन्देश देने वाले अज़हरी मियां के मुरीदों बड़े ही अनुशासित ढंग से नमाजे जनाजा पढ़ी और फिर धीरे धीरे सब अपने अपने शहरों और गांवों की तरफ कुच कर गए।

       भारत के हर राज्य से लेकर 127 मुल्कों से आए चाहने वालों ने अपने मुर्शिद के जनाज़े में ग़मज़दा दिल से पहुंचे बरेली में मुसलमानों की खिदमत के लिए हिंदुओं ने प्याऊ लगाये, बारिश में छाते दिए तो आज गर्मी के चलते अपने कूलर पंखे बाहर निकाल दिए।
लाखों लोगों ने दुआओं के लिए हाथ उठाए।

अजहरी मियां ने जीवन भर किसी भी सियासी जमात से ताल्लुक नहीं रखा,इसके बावजूद भारत के हर राज्य के मुख्यमंत्री ने अफ़सोस ज़ाहिर किया, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान ने आपके विसाल को बड़ा नुकसान बताया।

हम सब को एक दिन दुनिया से जाना है
अलविदा_तजुशशरिया।

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