Skip to Content

राजेस्थान: नीमराना में खुले आम चल रहा है अवैध खनन का धंधा

राजेस्थान: नीमराना में खुले आम चल रहा है अवैध खनन का धंधा

Comments

अलवर (मुकेश) थाना मन्धान के ग्राम बटाना ज़िला अलवर में चल रहे अंधाधुंध अवैध खनन के कारोबार से गांव का जनजीवन खतरे में है। प्रदूषण से गांव के बुजुर्ग और बच्चे दमा और सांस फूलने जैसी बीमारी से जूझ रहे है।
लगभग 700 घरों की आबादी वाले इस गांव को विकास छू भी नही पाया है। ग्रामीण घुट घुट कर जीने को मजबूर हैं।

पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा यह अवैध धंधा क्षेत्रवासियों के जीवन के लिए खतरा बना हुआ है लेकिन प्रशासन को इसकी भनक नही है। जबकि गांव वालों का कहना है कि इसकी शिकायत कई उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन से किया लेकिन कोई देखने तक नही आया।

पुलिस और प्रशासन की अनदेखी के कारण अवैध खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों का कहना है रात्रि के समय माफिया पहाड़ को तोड़ने के लिए बारूद का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी आवाज़ से रात्रि के समय ग्रामीणों की नींद उड़ जाती है। इस अवैध कारोबार में शासन, प्रशासन, पुलिस और नेताओं के मिले होने की आशंका है।
सूत्र बताते हैं अवैध खनन के कारोबारी लाखों रुपया महीना पुलिस और प्रशासन को पहुंचाते हैं इसी लिए कोई भी अधिकारी उनकी ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को तैयार नही है।

दिल्ली की समाजसेवी संस्था International Human Rights Protection Council को गांव वालों ने जानकारी दिया है और सहायता की मांग किया है। संस्था अभी ज़िला अधिकारी और खनन विभाग को पत्र लिख रही है। संस्था के अध्यक्ष केडी सिद्दीकी ने बताया कि अगर प्रशासन ने इस अवैध खनन को बंद नही करवाया तो संस्था ग्रामीणों के जीवन की रक्षा के लिये राजेस्थान हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करेगी।
editorgulistan@gmail.com

Previous
Next

One commentcomments2

  1. Deepak singh batana

    नीमराना बलोक के बटाना गाॅव मे अवैध खनन रोकने के लिए हुए लडाई खनन करने वालो ने रोकने वालो को पीटा खनन करने वाले बटाना की ढाणी के थे

  2. श्रीमान, भगवान शिव की पूजा जब गुरु स्वरूप में दी जाती है तब वह “गुरू गोरख नाथ “जी कहलाए जाते हैं। “गोरख” जिनका अर्थ है “गौमाता” के रक्षक। हिन्दू पुराणों में “गौ” में 33 कोटि देवि देवताओं का निवास माना गया है। जिसका एक अर्थ यह भी हुआ सदाशिव भगवान शिव का वह स्वरूप जिसमें वह न केवल सभी देवि देवताओं के पूज्यनीय गुरु हैं अपितु उनका पालन पोषण व संरक्षण भगवान शिव की प्राण उर्जा से ही हो रहा है। भगवान शिव को चाहें आप देवों के देव “महादेव” के रूप में पूजे या भक्त वत्सल “भोलेनाथ” के रूप में या फिर महायोगी भगवान शिव के गुरू स्वरूप “गुरू गोरखनाथ” के रूप में। वह तो हर रूप में शिव ही हैं और शिव ही रहेंगे जो सदैव भक्तजनों का कल्याण ही करते हैं कोई धंधा नहीं।

    यह मेरा एक श्रोता का निवेदन समझिए या एक भक्त का पर इतना ध्यान जरूर रखें कि परमपिता परमात्मा भगवान शिव की गरिमा का हनन न हो। गोरखधंधा शब्द भगवान शिव की गरिमा का अपमान करता है व आम जनमानस की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।

    किसी अन्य शब्द का प्रयोग कर लें तो उचित है। और अगर इस शब्द की तरफ आप अन्य न्यूज चैनल व पत्रकार लोगों को भी सचेत करें तो परमात्मा के कमल चरणों में यह एक सेवा ही होगी।

    अलख निरंजन।।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*