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उत्तर प्रदेश में अब अहिंसक मुठभेड़ ! पुलिस का अभिनव प्रयोग

उत्तर प्रदेश में अब अहिंसक मुठभेड़ ! पुलिस का अभिनव प्रयोग

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by October 15, 2018 Blogs

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपराध पर काबू पाने के लिए वहां वास्तविक या नकली मुठभेड़ का जो सिलसिला शुरू किया था, उसकी पोल खुल जाने के बाद अब उसने अपराधियों से पार पाने का एकदम अहिंसक रास्ता अख्तियार कर लिया है। अब पुलिस के लोग वहां सच्ची वाली गोली नहीं चला रहे हैं या शायद उन्हें गोली वाली पिस्तौल ही मुहैय्या नहीं कराई जा रही है। वहां की प्रयोगधर्मी पुलिस अब मुंह से ही ‘ठांय ठांय’ और ‘फूं फूं’ की हैरतंगेज़ आवाजें निकालकर अपराधियों को ठिकाने लगाने की मुहिम में जुट गई है। संभल में अपने पहले प्रयोग में उसे उल्लेखनीय सफलता भी मिली है। मौखिक मुठभेड़ के इस तरीके से अपराध में कमी आने के अलावा कुछ दूसरे फायदें होने की भी उम्मीद है, मसलन हवा में बारूद से होने वाले प्रदूषण का स्तर कम होगा, बिना असली गोली खाए अपराधी राजी-ख़ुशी मरने को तैयार हो जाएंगे और पुलिस द्वारा मुठभेड़ का पात्र चुनने में कोई भूल भी हुई तो सरकार को मृतक के आश्रितों को लाखों रुपयों का मुआवज़ा और सरकारी नौकरी नहीं देनी होगी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इससे भारत की अहिंसक और विश्वगुरु वाली छवि को बल मिलेगा। यू.पी पुलिस को अपने इस अभिनव प्रयोग की प्रेरणा जरुर हमारी केंद्र सरकार से ही मिली होगी जो घरेलू और विदेशी मामलों में मौखिक कार्रवाई के तरीके पिछले साढ़े चार साल से सफलतापूर्वक अपनाती रही है। देश के गृह और रक्षा मंत्री पाकिस्तान की ज्यादतियों के विरुद्ध असली मिसाइल युद्ध में उतरने के बजाय महीने में एक-दो बार मुंह से ही चेतावनी के बड़े-बड़े गोले दागकर उसे उसकी औक़ात बताते ही रहे हैं। हमारे वित्त मंत्री केवल मुंह से ही फूंक-फांक कर देश की अर्थव्यवस्था को उस ऊंचाई पर ले जा चुके हैं कि देश का आम आदमी वहां तक पहुंचने में हांफने लगा है। हमारे प्रधानमंत्री जी का तो कहना ही क्या ! उन्होंने असली विकास की जगह मुंह और हथेलियों की विभिन्न मुद्राओं से विकास की इतनी किस्म की आवाज़ें निकाली हैं कि बेचारा विकास भी घबराकर चीखने लगा है – बस करो, मैं हो गया !

अब वक़्त आ गया है कि यू.पी पुलिस की तरह आतंकग्रस्त कश्मीर की पुलिस भी इस नायाब खोज को स्थानीय और पाकिस्तानी आतंकियों पर अपनाकर देश में चल रही मौखिक, अहिंसक क्रांति में अपने हिस्से का योगदान दे।     लेखक: ध्रुव गुप्त, भारतीय पुलिस सेवा, Email:editorgulistan@gmail.com

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