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सराहनीय! चीख़ते, बिलखते बेसहारा घायलों के लिए खून देने पहुंचे मदर्से के छात्रों को लाखों सलाम

सराहनीय! चीख़ते, बिलखते बेसहारा घायलों के लिए खून देने पहुंचे मदर्से के छात्रों को लाखों सलाम

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अमृतसर के रेल हादसे ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। हृदयविदारक इस घटना के बाद जहां देश सदमें है। वही देश की सत्ता संभालने वाले जिम्मेदारों ने इस मामले पर घिनौनी सियासत शुरू कर दिया है।

कोई भी इस हादसे की ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नही है। मरने वालों में ज्यादातर गरीब और मध्यम वर्गीय लोग है। जो रोजी रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों से पंजाब गए हुए थे।
मुआवजा दे कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने वालों को न किसी पर दया आयी और न ही शर्मिंदगी महसूस हुई, होगी भी कैसे यह नपुंसक लोग तो कोठे पर बैठी वैश्या से भी गिरे हुए हैं। जिनका कोई ईमान धर्म ही नही है।

खूनी फाटक के आस पास रेल की पटरियों के किनारे क्षत विक्षत पड़े शव, किसी का हाथ नही है तो किसी सर नही है, कहीं पैर पड़ा है तो कहीं धड़ से अलग सर पड़ा हुआ है।
परिवार वालों चीख से आसमान फट रहा था। चारो तरफ अफरा तफरी का माहौल था। लोगों को समझ नही आ रहा था इतना खुशनुमा माहौल कुछ मिनटों में शमशान कैसे बन गया? कोई कहता है कि मेरा दोस्त यही पर अभी थोड़ी देर पहले किलकारियां मार रहा था, तो कोई कहता है मेरा बेटा अभी अभी मेरे से फोन पर बात कर रहा था। कहाँ चला गया मेरा लाल ? कोई बहु विधवा हो गयी तो कोई अनाथ होगया तो किसी का आंगन सूना हो गया, किसी के सहारे की लाठी टूट गयी।

अस्पतालों में लाशों के अंबार, चारो तरफ हाहाकार, रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर को देख कर मन विचलित हो उठता है। लोग लाशों के ऊपर से कफ़न उठा उठा कर देख रहे हैं कि यह मेरा लाल तो नही है जो सज धज कर दशहरा देखने गया था, तो कोई दवाइयों के लिए भाग रहा है तो कोई अपने घायल बेटे के लिए खून की तलाश में लार बार हो रहा है।

ऐसे समय अल्लाह के नेक बन्दों ने इंसानियत की कराहती आवाज़ को सुना और उन्हें बचाने के लिये संगठित हो कर आगे आये।
रेल हादसे में घायलों को खून देने के लिए आगे आये पंजाब के मदरसों के छात्रों ने मानवता की मिसाल पेश किया है। ऐसी आपदा में जब अस्पताल के बाहर चीखों पुकार मचा हुआ था, लोग एक यूनिट खून के लिये इधर उधर  भाग रहे थे, ऐसे समय में पंजाब के मुस्लिम युवाओं ने अपनी कौम को आवाज़ दिया कि सब लोग आएं, इंसानियत को बचाने के लिए। फिर क्या था देखते ही देखते खून देने वालों की लंबी लाइन लग गयी और दर्द से कराह रहे लोंगों के चेहरों पर मुस्कान खिल गयी, परिजनों के दिलों में सुकून और खून देने वालों के दुआ के हाथ उठ गए। “इंसान से ज़िन्दा है इंसानियत” इसका जीता जागता उदाहरण है पंजाब के मदर्से। इन नौजवानों को लाखों सलाम !By:KD Siddiqui, Email: editorgulistan@gmail.com

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