Skip to Content

यूपी में लगातार हो रहे पत्रकारों पर हमले, क़ानून व्यवस्था के लिए बने चुनौती

यूपी में लगातार हो रहे पत्रकारों पर हमले, क़ानून व्यवस्था के लिए बने चुनौती

Be First!

नोयडा (केडी सिद्दीकी)। पत्रकारों की सुरक्षा पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं और सरकारें समय समय पर उनकी सुरक्षा का वादा भी करती रहती है लेकिन यह सब सिर्फ जुमला नजर आ रहा है। सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के ढेर सारे वादों के बावजूद लगातार पत्रकारों की हत्या, धमकी और उत्पीड़न जारी है।

अभी इसी महीने जहां नोयडा के वरिष्ठ पत्रकार ललित मोहन पर दिन दहाड़े जानलेवा हमला हुआ है वहीं सेक्टर 39 पुलिस द्वारा शाहिद सैफी को पुलिस द्वारा पिटाई करने का मामला सामने आया है।
अम्बेडकर नगर में पत्रकार वसीम अहमद को 4 दिनों तक एसटीएफ ने अवैध गिरफ्त में रखा, जेआरपीसी के हंगामे के बाद रिहा किया गया। आज पत्रकार विवेक उपाध्याय पर जानलेवा हमला हुआ है। आये दिन हमला और उत्पीड़न सुरक्षा एजेंसियां और शासन, प्रशासन के लिए एक चुनौती बना हुआ है।

जहां पत्रकारों की हत्या में अपराधियों और अवैध कारोबारियों के हाथ होते हैं वहीं भृष्ट पुलिस अधिकारियों और नेताओं द्वारा पत्रकारों को फर्जी मामलों में फंसाने एवं उत्पीड़न के मामले किसी से छुपे नही हैं, लेकिन सरकार और जांच एजेंसिया छोटे पत्रकारों के मामलों को रफा दफा करने का प्रयास करती हैं। क्योंकि उनके साथ न कोई सन्गठन खड़ा होता है और न ही कोई बड़ा पत्रकार।

आज हालात ऐसे हो गए हैं कि देश का पत्रकार समाज जो सदा दूसरों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ता रहा है वह अपनी सुरक्षा के प्रति चिंतित है। उनका परिवार भय के वातावरण में जीवन यापन कर रहा है। संवेदनहीन सुरक्षा एजेंसियां और राजनैतिक दलों की उपेक्षा से निराश लोग पत्रकारिता को छोड़ लोग दूसरे क्षेत्र में नौकरी करने या फिर छोटा मोटा व्यवसाय कर के जीवन यापन कर रहे हैं।

पत्रकारों की दुर्दशा के जिम्मेदार भी पत्रकार समाज ही है। इनका बिखराव, संगठित नही होना और अलग अलग दलों में बंटे होने के कारण इनके अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने वाला कोई सन्गठन नही है। जिसके कारण यह लोग दिन पर दिन कमज़ोर होते जा रहे हैं।

जहां मेडिकल, इंजीनियरिंग, बिजनेस और कम्प्यूटर के क्षेत्र में युवाओं को अपना उज्ज्वल भविष्य दिखाई दे रहा है वही जर्नलिज्म की पढ़ाई करने वाले युवा दिशाहीन और टूटते बिखरते जा रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार अधिकार सुरक्षा परिषद (International Journalists Rights Protection Council) भारत की एक मात्र ऐसी संस्था है जो गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य कर रही है।

संस्था के संस्थापक kamruddin aiddiqui ने पत्रकारों पर हो रहे हमले और पुलिस द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न की कड़ी निंदा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिसिया उत्पीड़न के ख़िलाफ़ जल्द से जल्द अगर सार्थक कदम नहीं उठाते हैं तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

कमरूद्दीन सिद्दीक़ी ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सर्दी गर्मी , धूप और बरसात में अपने प्राणों की बाजी लगा कर निष्पक्ष सेवा करने वाले भारत के कलम के सिपाहियों की सुरक्षा अगर सुनिश्चित नही की गई तो उत्तर प्रदेश में पत्रकार अधिकार सुरक्षा परिषद अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेगा। By: KD Siddiqui,

E-mail:editorgulistan@gmail.com

Previous
Next

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*