Skip to Content

Greater Noida पुलिस पर मुस्लिम युवाओं को फर्जी मामलों में फंसा कर जेल भेजने का आरोप

Greater Noida पुलिस पर मुस्लिम युवाओं को फर्जी मामलों में फंसा कर जेल भेजने का आरोप

Be First!

ग्रेटर नोयडा। यूपी में योगी सरकार आने के बाद से जहां अपराधियों के इनकाउंटर और धर पकड़ तेज हो गयी है वहीं फर्जी एनकाउंटर और निर्दोष लोंगों को फर्जी मामलों में फंसाने के विरोध में जगह जगह हुए प्रदर्शन से विभाग और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं।

नोयडा, आज़मगढ़, अम्बेडकर नगर और लखनऊ जैसे कई शहरों में फर्जी एनकाउंटर के मामले सामने आये हैं। जिसमें मारे गए या घायलों और गिरफ्तार लोंगों के परिवार वालों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया है। इस तरह के ज्यादातर मामलों में गरीब और अनपढ़ मुसलमानों को ही आरोपी बनाया गया है।

अभी ताजा मामला ज़िला गौतमबुद्ध नगर का है जहां पर ग्रेटर नोयडा में कबाड़ी का कारोबार करने वाले नौजवानों को पुलिस ने उनकी दुकान और घर से उठा कर अवैध वसूली का प्रयास किया और मुंहमांगी रकम नही मिलने पर उनके ख़िलाफ़ गम्भीर मामले बना कर जेल भेज दिया।

गौरतलब है कि दिनांक 14 नवम्बर को ग्रेटर नोयडा पुलिस द्वारा प्रेस नोट जारी करके बताया गया कि पुलिस मुठभेड़ में 5 लोंगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गए युवकों के पास से एक चोरी की एक्सेंट कार और अवैध पिस्टल बरामद करने का दावा किया गया है। जबकि परिवार वालों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पुलिस को बेगुनाह युवाओं को फर्जी मामलों में फंसाने का आरोप लगाया है।

गिरफ्तार किए गए युवा-
1-इरफान पुत्र बल्ले, निवासी बुलन्दशहर
2-शाहिद पुत्र सलीम,निवासी बुलन्दशहर
3-मोहसिन पुत्र कल्लू निवासी ग्रेटर नोयडा
4-जावेद पुत्र शहीद निवासी सिकंदराबाद बुलन्दशहर
5-आशिक पुत्र निसार सिकंदराबाद बुलन्दशहर
उपरोक्त गिरफ़्तार आरोपियों के परिवार वालों का कहना है कि पुलिस स्वयं हमारे लड़कों से गलत काम करने का दबाव बना रही थी। जब उन्होंने चोरी का कबाड़ा खरीदने से मना कर दिया तो पुलिस द्वारा उन्हें दुकान से उठा कर एनकाउंटर करने की धमकी दी गयी और बदले में लाखों रुपये की डिमांड किया गया जब सब ने पैसा देने में असमर्थता जताई तो पुलिस ने उनके मोबाईल फोन और जो उनके पास नकदी था सब ले लिया और 4 दिन तक अवैधरूप से बंधक बना कर उनके साथ मार पीट किया और तरह तरह की यातनाएं दी गयी। जब पुलिस को लगा कि इनसे कुछ हासिल होने वाला नही है तो फर्जी मुठभेड़ दिखा कर उनके ऊपर फर्जी मुकद्दमा ठोक दिया गया।

आज परिवार के लोगों ने क्षेत्र के सम्मानित लोंगों के साथ ज़िला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मिल कर उपरोक्त मामले की जांच करके उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया।

उपरोक्त मामले की पड़ताल में सवाल यह उठता है कि जब उपरोक्त आरोपियों को पुलिस ने उनकी दुकान से और घर से गिरफ्तार किया और 4 दिन से वह लोग पुलिस की गिरफ्त में थे तो फिर मुठफेड की नौबत कैसे आगयी?
यह एक्सेंट कार जिसे पुलिस चोरी की बता रही है वह किसकी है?
आरोपियों के पास असलहा कहाँ से आया?
गिरफ्तार युवकों की मोबाईल की लोकेशन से स्थित काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है लेकिन यह सब कौन करेगा?
जब उपरोक्त मामले में पुलिस प्रशासन स्वयं लिप्त है तो फिर निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे किया जा सकता है।

क्षेत्रीय समाज सेवी और किसान नेता मेहंदी हसन ने कहा कि यूपी पुलिस के कुछ भृष्टाचारी पैसा और प्रमोशन के लिए निर्दोष युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और इस खेल में ख़ास तौर से मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। जिससे कि उनके अंदर भय का माहौल बना रहे। जिनके कारण पूरे प्रदेश की पुलिस की छवि धूमिल हो रही है।

मुसलमानों को फर्जी मामलों में फंसा कर पुलिस जहां उनका भविष्य अंधकारमय बना रही है वहीं दुनियाँ के सामने उन्हें आतंकवादी, अपराधी और देशद्रोही बना कर पेश करने का घिनौना खेल खेला जा रहा है।

पुलिस की यह दमनकारी और तानाशाही रवैया से मानवाधिकारों का खुला उलंघन हो रहा है और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी डफली और अपना राग अलापने में मस्त हैं।
Report: Advocate Yunus Abbasi, editorgulistan@gmail.com

Previous
Next

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*