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Human Rights Day: कर्तव्य किये बिना अधिकार नहीं मिलते हैं:KD Siddiqui

Human Rights Day: कर्तव्य किये बिना अधिकार नहीं मिलते हैं:KD Siddiqui

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मानवाधिकारों को परिभाषित करने की दृष्टि से और उनकी पहचान को अंतर्राष्ट्रीय बनाने के लिए 10 दिसम्बर 1048 को संयुक्त राष्ट्र संघ में इन अधिकारों की विस्तृत रूपरेखा स्वीकार की गई। 30 अध्याय वाले इस घोषणा पत्र में ऐसे अधिकारों  का उल्लेख है जिन्हें दुनिया भर के स्त्री पुरुष बिना किसी भेदभाव के पाने के अधिकारी है। इन अधिकारों में व्यक्ति के जीवन, दैनिक स्वतंत्रता, सुरक्षा एवं स्वाधीनता, दस्ता से मुक्ति, निरंकुश गिरफ्तारी एवं नजरबंदी से मुक्ति, स्वतंत्रत एवं निष्पक्ष न्यायाधिकरण के सामने सुनवाई का अधिकार, अपराध प्रमाणित होने तक निरपराध माने जाने का अधिकार, विवाह करने एवं परिवार बसाने का अधिकार, विचार, धर्म, उपासना की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने की आज़ादी, मतदान करने एवं सरकार में शामिल होने की स्वतंत्रता, सामाजिक स्वतंत्रता का अधिकार, काम करने का अधिकार, रोजगार पाने का अधिकार, समुचित जीवन का अधिकार, शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार, समाज के समस्कृतिक जीवन में सहभागी बनने का अधिकार शामिल है।

मानवाधिकारों के लिए भारतीय संविधान के दरवाजे आदर के साथ खुले हुए हैं, जिसमें समानता, धर्म, प्रजाति, जाति, यौन अथवा वर्ग के आधार पर शोषण के विरुद्ध प्रतिबन्ध, अवसर की समानता, जीवन तथा व्यक्ति स्वातन्त्र्य की स्वतंत्रता और शिक्षा का अधिकार आदि शामिल है।
लेकिन हकीकत क्या है? अधिकारों की ज़मीन किसके लिए उर्वरा और किसके लिए बांझ है?
बराबरी, संवृद्धि, शिक्षा, स्वस्थ एवं शुद्ध निर्मल जल और मलय पवन किनकी किस्मत में हैं और दुर्भाग्य के मारे हुए कौन हैं? ज़िन्दगी का महासागर जिन शहरों और गांवों की तंग गलियों और खेतों में लड़ा जा तैह है, उनके सूत्रधार कहाँ छिपे रहते हैं और उनके बदले किसको पकड़ लिया जाता है और मार दिया जाता है इसका वृतांत किस रामायण और महाभारत में है?

किस बड़े तथा कथित बड़े आदमी की हत्या के जुर्म में किस बेगुनाह छोटे निरपराध आदमी को पकड़ कर गोली मार दी गयी है?
इसके सुबूत या फैसले किस न्यायालय या न्यायाधीश ने लिखे हैं?”सबै भूमि गोपाल की ” कहने वाले धर्माचार्य के खाते में कितनी भूमि दर्ज है ? इसकी कभी तलाशी क्यों नही हुई? ऐसे हजारों सवाल हैं और यही मानव अधिकारों का खूबसूरत गुलदस्ता है।
By: KD Siddiqui, Founder: International Human Rights Protection Council, Email:editorgulistan@gmail.com

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