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भारत पर नहीं लगी डब्ल्यूटीओ वार्ता नाकाम होने की तोहमत

भारत पर नहीं लगी डब्ल्यूटीओ वार्ता नाकाम होने की तोहमत

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by December 18, 2017 व्यापर

नई दिल्ली। इस बार विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की बैठक से भारत की वापसी खलनायक के रूप में नहीं हो रही है। यह पहला मौका है जब वार्ता की विफलता के लिए भारत को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने यह बात कही। डब्ल्यूटीओ का 11वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन अमेरिका द्वारा खाद्य भंडारण के मुद्दे पर स्थायी समाधान की अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हटने की वजह से बेनतीजा रहा।

विश्व व्यापार संगठन की वार्ता के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए प्रभु ने कहा, ‘हम यहां खुले मन से आए थे। लेकिन कुछ सदस्यों के अड़ियल रुख की वजह से चीजें आगे नहीं बढ़ पाईं।’ अमेरिका और कई अन्य सदस्य देश पहले की वार्ताओं में खाद्य भंडारण के मुद्दे पर प्रतिबद्धता जता चुके थे, लेकिन बाद में मुकर गए। वार्ता टूटने की वजह से सम्मेलन के अंत में कोई मंत्रिस्तरीय वक्तव्य नहीं जारी किया जा सका। हालांकि सम्मेलन की अध्यक्ष और अर्जेटीना की मंत्री सुसाना मालकोरा का वक्तव्य जारी किया गया था।

प्रभु के मुताबिक, कुछ देशों के अड़ियल रुख के चलते विफल हुई वार्ता से भारत को कोई नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि विकासशील राष्ट्रों के बीच हमारी प्रतिष्ठा बढ़ी है। पिछली मंत्रिस्तरीय बैठकों में भारत पर अड़ियल रुख अपनाने का आरोप लगता रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सम्मेलन के दौरान उन्होंने दो दर्जन द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सेदारी की। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर भारत और अन्य विकासशील देशों का रुख स्पष्ट करने में मदद मिली। भारत खाद्य सुरक्षा के मुद्दे का स्थायी समाधान चाहता है। भारत ऐसा समाधान चाहता है जो पीस क्लॉज से बेहतर हो। अमेरिकी आपत्ति भारत को लेकर नहीं, बल्कि कुछ अन्य देशों के प्रस्ताव पर थी। संभवत: अमेरिका का विरोध चीन को लेकर था।

डब्ल्यूटीओ के मुताबिक, किसी भी सदस्य देश में खाद्य सब्सिडी की अधिकतम सीमा वहां के कुल उत्पादन के 10 फीसद से ज्यादा नहीं हो सकती। भारत में खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को व्यापक पैमाने पर लागू करने से इस सीमा के उल्लंघन होने का अनुमान है। इसीलिए भारत खाद्य सब्सिडी की गणना के तरीके में बदलाव की मांग कर रहा है। इस संबंध में दिसंबर, 2013 में बाली में डब्ल्यूटीओ की मंत्रिस्तरीय बैठक में पीस क्लॉज के नाम से अंतरिम व्यवस्था दी गई। इसके साथ ही मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। इस बार भी स्थायी समाधान नहीं निकलने से पीस क्लॉज की व्यवस्था बनी रहेगी।

फरवरी में होगी कुछ WTO देशों की बैठक
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने बताया कि खाद्य सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर समर्थन जुटाने के लिए फरवरी में भारत डब्ल्यूटीओ के कुछ सदस्य देशों की बैठक बुलाएगा। यह लघु-मंत्रिस्तरीय बैठक की तरह होगी। इसकी रूपरेखा बाद में तैयार की जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य समान विचारधारा वाले देशों को एक साथ लाना और साझा हित से जुड़े मुद्दों पर विमर्श के साथ-साथ भारत का रुख स्पष्ट करना है। बैठक का फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब विकसित देश निवेश सुविधा बढ़ाने, ई-कॉमर्स के लिए नियम तैयार करने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और फिशरीज पर सब्सिडी कम करवाने की तैयारी में लगे हैं।

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