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लोकसभा: 66 हजार करोड़ के अनुदान की पूरक मांगें पेश की

लोकसभा: 66 हजार करोड़ के अनुदान की पूरक मांगें पेश की

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by December 19, 2017 व्यापर

नई दिल्ली। राजस्व संग्रह की चुनौतियों को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार खर्च बढ़ाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 66,113 करोड़ रुपये की अनुदान की पूरक मांगें सोमवार को लोकसभा में पेश कीं। यह दूसरा मौका है जब मौजूदा वित्त वर्ष में अनुदान की पूरक मांगें पेश की गई हैं। इनके जरिये सरकार ने गरीबों को बिजली कनेक्शन मुहैया कराने और यूरिया सब्सिडी के लिए धनराशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अनुदान की पूरक मांगें लोकसभा में रखीं। इनमें 1,033 करोड़ रुपये का आवंटन गरीबों को बिजली मुहैया कराने की सरकार की नई योजना सौभाग्य (प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना) के लिए किया गया है। इसी तरह मनरेगा के लिए 3,594.57 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। इसके अलावा 20,532.5 करोड़ का आवंटन यूरिया सब्सिडी, जीएसटी नेटवर्क के लिए 960 करोड़ रुपये और 15,908 करोड़ रुपये राष्ट्रीय राजमार्गो के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।

वित्त मंत्री ने नई सेवाओं के लिए 1.3 करोड़ रुपये टोकन राशि आवंटित भी की है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से पेंशन में वृद्धि के लिए भी 5,905 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआइ के लिए अतिरिक्त सब्सिडी के रूप में 3,480 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। कुल मिलाकर जितनी धनराशि की मांग पूरक अनुदान मांगों के रूप में की गई है, उसमें शुद्ध नकद खर्च मात्र 33,379.99 करोड़ रुपये है, जबकि 32,732.05 करोड़ रुपये विभिन्न मंत्रलयों की बचत से आएगा।

अनुदान मांगों के जरिये सरकार अधिक राशि खर्च करने की तैयारी कर रही है। वहीं दूसरी ओर राजस्व संग्रह के मोर्चे पर चुनौतियों के चलते राजकोषीय घाटा (सभी तरह के राजस्व और व्यय का अंतर) भी काबू से बाहर होने का खतरा है। हालांकि अब तक केंद्र सरकार कहती रही है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखा जाएगा। किसी भी अतिरिक्त खर्च के लिए सरकार पूरक अनुदान मांगें पेश करती है। इन अनुदान मांगों के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है।

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