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विधानसभा: पक्ष विपक्ष लॉबी का नाम बदलने पर जमकर नोंक- झोंक

विधानसभा: पक्ष विपक्ष लॉबी का नाम बदलने पर जमकर नोंक- झोंक

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लखनऊ। विधानसभा में जिधर सत्तापक्ष के सदस्य बैठते उधर ‘हां और विपक्ष की तरफ ‘ना लिखा होता था लेकिन, सोमवार को मंडप में हां-ना की जगह सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष लिखे जाने पर खूब नोक-झोंक हुई। विपक्षी सदस्यों ने इसे नियम समिति को सौंपे जाने की मांग की। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि यह ब्रिटिश परंपरा से मुक्ति पाने का प्रयास है।

सोमवार को यह मसला बसपा के वरिष्ठ सदस्य सुखदेव राजभर ने उठाया। राजभर ने कहा कि मंडप जब से स्थापित हुआ सदस्य हां-ना की लाबी में बंटे थे लेकिन, इसे बदलकर सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष लिख दिया गया है, यह क्यों हुआ। नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने राजभर की बात पर बल दिया। कहा, परिवर्तन चल रहा है। भवन, कुर्सी, बिल्डिंग सब जगह रंग बदले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मन बदल लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सदन लोकसभा और राज्यसभा से ऊपर हो गया है। क्या संसदीय परंपराएं बदली जा रही हैं। बसपा के लालजी वर्मा और कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने भी इस पर एतराज जताते हुए इसे नियम समिति को सौंपने की मांग की।

विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि यह साम्राज्यवादी परंपराओं से मुक्त होने की छटपटाहट है। अंग्रेजी परंपरा को तोडऩे की कड़ी है। आपने मुझे अध्यक्ष चुना तो अध्यक्ष के छिपने की परंपरा तोड़कर मैं आपको यहां आसन पर बैठा मिला। मैं तो एक संदेश देना चाहता था। यह हां-ना ब्रिटिश परंपरा की देन है। यहां की गड़बड़ चीज हम सुधार रहे हैं। यह धीरे-धीरे मुक्ति पाने का प्रयास है। सपा के संग्राम यादव ने कहा कि तब तो भारत का संविधान भी दूसरे देशों से लिया गया है। कुछ भवन भी ब्रिटिश काल के हैं, क्या उनका भी बदलाव होगा। दीक्षित ने कहा कि भारत का संविधान बना तबसे कई संशोधन हुए हैं।

सपा के पारसनाथ यादव का कहना था कि अगर यह करना था तो सभी सदस्यों को विश्वास में लेना चाहिए था। नेता प्रतिपक्ष चौधरी ने कहा कि अध्यक्ष जी आपका अधिकार असीमित है लेकिन, आप सोचिए कि हां-ना हिंदी शब्द है। संसद, राष्ट्रपति भवन और रेल सब तो अंग्रेजों के समय के हैं, क्या इन्हें भी समाप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस आसन पर आप बैठे हैं वहां बड़े मनीषी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैठे लेकिन, वह भी नहीं बदले। आप सरकारों के षड्यंत्र में न फंसे। कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने इसे नियम समिति में ले जाने पर जोर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए मुझे कोई पश्चाताप नहीं है। मैंने अपने विवेक से निर्णय लिया है।

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