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350 परियोजनाएं अटकीं, खजाने पर पड़ा 2.65 लाख करोड़ रुपये का बोझ

350 परियोजनाएं अटकीं, खजाने पर पड़ा 2.65 लाख करोड़ रुपये का बोझ

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by December 21, 2017 व्यापर

नई दिल्ली। देशभर में करीब 350 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समय से पूरा नहीं होने से इनकी लागत 2.65 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री विजय गोयल ने बुधवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। इन सभी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों की लागत 150 करोड़ रुपये या इससे ज्यादा है। देरी अन्य कारणों से परियोजनाओं की लागत बढ़ने का बोझ सरकार के खजाने पर पड़ता है।

गोयल ने लिखित जवाब में कहा कि पहली अक्टूबर, 2017 को उनके मंत्रालय की निगरानी में कुल 1,263 परियोजनाएं थीं। इनमें से 297 प्रोजेक्ट देरी का शिकार हुए हैं, जबकि 350 की लागत बढ़ चुकी है। ऐसे प्रोजेक्टों की संख्या 103 है जिनमें देरी और लागत वृद्धि दोनों हुई है। जहां तक परियोजनाओं में देरी का सवाल है, तो इसके लिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी में विलंब, फंडिंग संबंधी अवरोध और पुनर्वास के मुद्दे मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

सरकार के पास 7,400 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम शेष: सरकार के पास दूरसंचार क्षेत्र के लिए 7,446 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध है। इसमें से 80 फीसद दो नए बैंड में है। ये दोनों बैंड मोबाइल टेलीफोन सेवा के लिए निर्धारित किए गए हैं। संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार का अगले वर्ष मार्च तक राष्ट्रीय दूरसंचार नीति को अंतिम रूप देने का इरादा है। नई नीति में दूरसंचार क्षेत्र में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य और नीतियां तय की जाएंगी।

सिन्हा ने कहा कि 770 मेगाहर्ज् स्पेक्ट्रम 700 मेगाहर्ज्म के प्रीमियम बैंड में उपलब्ध है। इसी तरह 2100 मेगाहर्ज्स बैंड में 275 मेगाहर्ज्ल स्पेक्ट्रम की उपलब्धता है। अन्य बैंडों पर भी कम मात्र में स्पेक्ट्रम बचा हुआ है। सरकार की ओर से टेलीकॉम सेवा के लिए चिह्नित दो नए बैंड 3300-3400 मेगाहट्र्ज और 3400-3600 मेगाहर्ज्ड हैं। अकेले 3300-3400 मेगाहर्ज्0 बैंड में स्पेक्ट्रम की उपलब्धता 6,050 मेगाहर्ज् की है। दूरसंचार विभाग जल्द ही कुछ स्पेक्ट्रम की नीलामी पर विचार कर रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग में 3,385 करोड़ का निवेश

भारत में उत्पादों की मैन्यूफैक्चरिंग को प्रोत्साहनों की खातिर चयनित इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने 30 सितंबर तक 72 परियोजनाओं में 3,585 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आइटी राज्यमंत्री अलफोंस कन्ननथनम ने यह लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि इन कंपनियों ने प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर 27,804 लोगों को रोजगार दिया है।

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