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‘2G’ के बाद अब ‘आदर्श’ घोटाला : CBI खाली हाथ, पूर्व CM चव्हाण पर नहीं चलेगा केस

‘2G’ के बाद अब ‘आदर्श’ घोटाला : CBI खाली हाथ, पूर्व CM चव्हाण पर नहीं चलेगा केस

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मुंबई: 2जी घोटाले पर फैसले के बाद कांग्रेस के लिए एक और राहत की खबर है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण को आदर्श हाउसिंग सोसाइटी केस में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बंबई उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित आदर्श हाउसिंग घोटाला मामले में अशोक चव्हाण पर मुकदमे को लेकर महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव के फैसले को आज खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति आरवी मोरे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने चव्हाण की याचिका पर सुनवाई के बाद राज्यपाल के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने संबंधित मामले को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को मुकदमा दायर करने की अनुमति दी थी।

उच्च न्यायालय ने सीबीआई की खिंचाई की
उच्च न्यायालय ने कहा कि आदर्श सोसाइटी घोटाला मामले में सीबीआई चव्हाण पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगते वक्त उनके खिलाफ कोई नया सबूत पेश करने में नाकाम रही। न्यायालय ने मामले में ताजा साक्ष्य पेश किए जाने में विफलता और मुकदमे के लिए राज्यपाल से मंजूरी मांगने के लिए सीबीआई की खिंचाई भी की।

CBI ने दाखिल किया अशोक चव्हाण का नाम
अशोक चव्हाण उन 13 लोगों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ सीबीआई ने आदर्श घोटाले में चार्जशीट दाखिल किया था। सीबीआई ने अपने पत्र के साथ दो सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट के अलावा मुंबई उच्च न्यायालय की वे टिप्पणियां भी भेजी थीं, जो 2014 में आपराधिक पुनर्वीक्षा आवेदन दाखिल करने पर की गई थी। जांच आयोग में न्यायाधीश जे.ए. पाटिल (सेवानिवृत्त) और पूर्व मुख्य सचिव पी. सुब्रमण्यम शामिल थे।

PunjabKesariक्या है आदर्श घोटाला?
गौरतलब है कि आदर्श हाउसिंग सोसायटी के अपार्टमेंट कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों के लिए थे। लेकिन नियम-कानूनों का उल्लंघन कर ये अपार्टमेंट सैन्य अफसरों, राजनेताओं तथा नौकरशाहों को आवंटित कर दिए गए। साल 2010 में यह घोटाला सामने आने के बाद महाराष्ट्र में सियासी तूफान खड़ा हो गया था। अंतत: तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था।

एक नजर ‘आर्दश’ टाइम्लाइन परः  
नवंबर 2010: आदर्श घोटाला सामने आया और सीबीआई की जांच हुई शुरू।

29 जनवरी, 2011: सीबीआई ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण सहित 14 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 (बी) (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया।

चार जुलाई, 2012: सीबीआई ने इस मामले में पहला आरोपपत्र सीबीआई की विशेष अदालत में दायर किया।

दिसंबर 2013: महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायणन ने अशोक चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार किया।

जनवरी 2014: सत्र अदालत ने सीबीआई के अनुरोध पर बतौर आरोपी अशोक चव्हाण का नाम मुकदमे से हटाने से इनकार किया।

मार्च 2015: बंबई उच्च न्यायालय ने मुकदमे से नाम हटाने का अनुरोध करने वाली अशोक चव्हाण की याचिका को खारिज किया।
अक्तूबर 2015: सीबीआई ने चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी प्राप्त करने के वास्ते महाराष्ट्र के राज्यपाल सीएच विद्यासागर राव को और सबूत सौंपे।

फरवरी 2016: राज्यपाल राव ने अशोक चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति सीबीआई को दी। राज्यपाल के आदेश के खिलाफ चव्हाण उच्च न्यायालय पहुंचे।

22 दिसंबर, 2017: उच्च न्यायालय ने चव्हाण की याचिका स्वीकार की । उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने के राज्यपाल के आदेश को खारिज किया।

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