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संभल में मौजूद है मंदिर-ईदगाह के बीच सद्भाव की दीवार

संभल में मौजूद है मंदिर-ईदगाह के बीच सद्भाव की दीवार

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संभल। बेवजह इल्जाम है दीवार पर बंटवारे का, कई लोग एक कमरे में भी अलग रहते हैं..।’ किसी शायर की य लाइनें सही भी हैं, दीवारें तो बेवजह ही बदनाम हैं, नफरत और मुहब्बत तो इंसान पैदा करता है। जुबां में मिठास और दिल में मुहब्बत का जज्बा हो तो दीवारें भी मायने नहीं रखतीं। यही साबित कर रही है चंदौसी के गोशाला रोड पर बने शिव मंदिर और ईदगाह के बीच की दीवार। दोनों के बीच की दीवार एक ही है, लेकिन क्या मजाल, कभी यहां के लोगों के बीच आपसी सौहार्द में कोई फर्क आया हो।

नगर के गोशाला रोड पर गली में शिव मंदिर स्थित है, जो लगभग 150 साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है। इसी के बगल में ईदगाह बनी है। मंदिर और ईदगाह के बीच एक ही दीवार है। मंदिर की सेवा राधेश्याम करते हैं, जिनकी उम्र लगभग 72 साल है।

वह बताते हैं कि पहले उनके दादा काशीराम और फिर उनके पिता चोखेलाल मंदिर में सेवा करते थे। अब वह इसकी रोजाना धुलाई, सफाई समेत समय से खोलने और बंद करने का काम करते हैं। पहले यहां खेत थे, जिनके बीचो-बीच यह मंदिर स्थापित था।

यही स्थिति ईदगाह की भी है। यह भी लगभग 125 साल से ज्यादा पुरानी बताई जाती है। ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष मुहम्मद अमीक बताते हैं कि उनसे पहले उनके वालिद अब्दुल मजीद कमेटी के अध्यक्ष थे। क्या मजाल कि कभी मनमुटाव तक की नौबत आई हो। यहां रहने वाले लोग भी यही कहते हैं कि मंदिर और मस्जिद के झगड़े तो राजनीति की पैदाइश हैं, उन्हें उससे क्या। मंदिर और ईदगाह के बीच दीवार तो है, लेकिन वह प्रेम और भाईचारे की है।

मंदिर के सामने मस्जिद भी: मंदिर के सामने मुख्य मार्ग पर ही मस्जिद भी स्थित है, जहां हर जुमे को नमाज अदा की जाती है। इसमें भी बड़ी संख्या में मुस्लिम शिरकत करते हैं। मुहम्मद अमीक बताते हैं कि वैसे तो रोजाना ही नमाज अदा कराई जाती है, लेकिन जुमे की नमाज खास होती है। सामने स्थित मंदिर पर लोग पूजा करते हैं तो मस्जिद में नमाज की जाती है लेकिन आज तक कोई झगड़ा नहीं हुआ।

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