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जीएसटी को अपनाया: वायु प्रदूषण में हांफे उद्योग-धंधे

जीएसटी को अपनाया: वायु प्रदूषण में हांफे उद्योग-धंधे

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by December 26, 2017 दिल्ली
नई दिल्ली : दिल्ली का उद्योग व व्यापार जगत इस वर्ष कई बदलावों का गवाह बना। इन परिवर्तनों की बागडोर राज्य सरकार की जगह इस बार केंद्र सरकार के हाथ में रही। नोटबंदी और जीएसटी सरीखे फैसलों ने परंपरागत बाजार में कारोबारी तौर तरीकों में आमूलचूल परिवर्तन लाने का काम किया। करीब एक लाख नए उद्यमी व कारोबारी टैक्स व्यवस्था से जुड़े, जिससे सरकारी राजस्व में वृद्धि हुई तथा विभिन्न प्रकार के टैक्सों से बाजार को निजात मिली।

वर्ष का आरंभ नोटबंदी में खुद को सहज करने की कोशिश के साथ हुआ तो वर्ष के मध्य में लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने कारोबारियों और उद्यमियों को व्यस्त कर दिया। वर्षात तक जीएसटी को अपनाकर उद्योग-धंधे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ ही रहे थे तभी वायु प्रदूषण में हांफने लगे। इस कारण कुछ दिनों के लिए लघु व मध्यम उद्योग में उत्पादन ठप रहा और दूसरे राज्यों से आने वाले ग्राहकों ने भी दिल्ली से दूरी बना ली। वायु प्रदूषण का डंडा ऐसा चला कि बाजारों के पार्किंग स्थलों का शुल्क महंगा हो गया। सरोजनी नगर जैसे बाजारों के पार्किंग स्थलों को प्रतिबंध की मार झेलनी पड़ी। अब वायु प्रदूषण का फिर खतरनाक स्तर कारोबारियों और उद्यमियों को डराने लगा है।

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नोटबंदी से कैशलेस की ओर बढ़ा कारोबार

पिछले वर्ष आठ नवंबर को नोटबंदी ने दिल्ली के उद्योग-धंधों को तगड़ा झटका दिया था। वर्ष की शुरुआत में भी इसका असर देखने को मिला। बाजारों में नकद का प्रवाह काफी कम था। ऐसे में नकद में व्यापार करने वाले बाजार चिंतित थे। चांदनी चौक, करोलबाग व दरियागंज जैसे बाजारों का कारोबार काफी कम हो गया था। इसी तरह थोक बाजार खारी बावली, भगीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, मोरी गेट जैसे बाजारों में भी मांग काफी घट गई। वैसे, नोटबंदी ने इन परंपरागत बाजारों को तकनीक की तरफ बढ़ने को प्रेरित किया। काफी संख्या में कारोबारी और दुकानदार कैशलेस और मोबाइल वॉलेट भुगतान की ओर बढ़े। आज स्थिति यह है कि पर्याप्त नकद होने के बाद भी लोग कैशलेस भुगतान को तरजीह दे रहे हैं। जहां इसकी सुविधा उपलब्ध है, वहां इसका प्रयोग अधिक है। हालांकि, बीच-बीच में 2000 के नोट बंद होने की अफवाहें भी बाजार में सुनने को मिली।

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जीएसटी पर ठिठका फिर उसे अपनाने लगा बाजार

टैक्स सुधार में आए क्रांतिकारी बदलाव से उद्यमियों और व्यापारियों को विभिन्न प्रकार के टैक्सों से राहत मिली, लेकिन इसे अपनाना आसान नहीं था। शुरू में जीएसटी पोर्टल के साथ वस्तुओं के एचएसएन कोड ने परेशान किया। उसे समझने में सभी व्यापार उलझे रहे। वैसे, इस पर सियासत भी खूब हुई। बंद कमरे में जीएसटी काउंसिल के फैसलों पर सहमति और सवाल भी खूब उठे, हड़ताल व धरना-प्रदर्शन हुआ। कारोबारियों और उद्यमियों की दिक्कतों को जीएसटी काउंसिल ने समझा और डेढ़ करोड़ रुपये से कम कारोबार करने वाले कारोबारियों को त्रैमासिक जीएसटी रिटर्न भरने समेत 28 फीसद के स्लैब में शामिल काफी सामानों को नीचे की कर दरों में लाया गया, जिसका लोगों ने स्वागत किया।

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बिटकॉइन के उछाल ने चौंकाया

वर्चुअल करेंसी बिटकॉइन ने दिल्ली के उद्यमियों और कारोबारियों को चौंकाया। इसकी चर्चा भी खूब रही कि यहां के लोगों ने बिटकॉइन में पैसा लगाया, लेकिन इसका सिरा नहीं मिला।

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सियासत ही करती रह गई राज्य सरकार

दिल्ली की सरकार बाजारों को लेकर सियासत ही करती नजर आई। चुनावी वादे में बाजारों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा था। कारोबारी सरकार को वादा याद कराते ही रह गए, लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब जब सरकार के तीन साल पूरे होने वाले हैं तो फिर सरकार को कारोबारियों की याद आई है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने कहा कि बाजारों को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

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सिंगल विंडो क्लीयरेंस की आस देखते रह गए उद्यमी

दिल्ली में उद्योग धंधे बढ़ाने को लेकर मंच से दावे-वादे तो खूब हुए, लेकिन जमीन पर कुछ हुआ नहीं। सिंगल विंडो सिस्टम की भी खूब बात हुई थी, लेकिन दिल्ली के उद्यमियों के लिए इस वर्ष भी यह दूर की कौड़ी रही। यहां तक कि नगर निगमों द्वारा फैक्ट्री शुल्क हटाने का प्रस्ताव पारित कर दिल्ली सरकार को भेजा गया, लेकिन सरकार ने अभी तक उस पर कोई फैसला नहीं लिया है।

वायु प्रदूषण ने किया परेशान

वायु प्रदूषण ने दिल्ली वालों के साथ यहां आने वाले पर्यटकों को भी परेशान किया। स्मॉग के कारण दिल्ली के गैस चेंबर बनने की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी छाई। इस कारण काफी संख्या में पर्यटकों ने दिल्ली आने से परहेज किया। वैसे, पर्यटन उद्योग को बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ। करोलबाग और पहाड़गंज को पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने की योजना कागजों तक ही सीमित रही। वैसे, उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा गंभीरता दिखाए जाने के बाद देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र चांदनी चौक को चमकाने की कवायद शुरू हुई है। लटकते तारों को व्यवस्थित किया जा रहा है। इसके अलावा यहां अन्य काम भी हो रहे हैं।

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