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6 दिन की लड़ाई और इस तरह से इजरायल ने अरब जगत में डाल दी फूट

6 दिन की लड़ाई और इस तरह से इजरायल ने अरब जगत में डाल दी फूट

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कायरो । मध्य पूर्व का जिक्र होते ही अरब देशों और इजरायल के बीच संघर्ष की एक लंबी कहानी जेहन में तैरने लगती है। इजरायल की मान्यता को लेकर अरब देश हमेशा से संघर्ष की स्थिति में रहे। अरब देश जहां इजरायल के वजूद पर सवाल उठाते रहते हैं, वहीं इजरायल ने 1948 और 1967 की लड़ाई में अरब देशों को जबरदस्त मात देकर अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित की। ये बात अलग है कि आज भी इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष जारी है। लेकिन इन सबके बीच हाल ही में अमेरिका द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दिए जाने पर मध्य पूर्व तनाव के ढेर पर खड़ा है। अमेरिका के इस कदम की दुनिया भर में आलोचना हुई, यहां तक संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में ट्रंप प्रशासन को मुंह की खानी पड़ी। अमेरिका और अरब देशों के बीच तनाव में 5 जून 1967 का वो मंजर याद आता है, जब  महज 6 दिनों की लड़ाई में अरब देशों की एका को न केवल इजरायल ने तोड़ा बल्कि भविष्य में होने वाले संघर्ष की बुनियाद तैयार कर दी। 

कब हुआ युद्ध 
अरब-इजरायल युद्ध 5 जून 1967 को शुरु हुआ। इजरायली विमानों ने सुबह सुबह मिस्र की राजधानी कायरो के नजदीक स्वेज के रेगिस्तान में सैन्य हवाई अड्डे पर जबरदस्त बमबारी की। कुछ घंटों के अंदर ही मिस्र के करीब सभी विमान मार गिराए गए। मिस्र के वायुक्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित कर पहले ही दिन इजरायल ने एक लड़ाई अपने नाम कर ली ।

कैसे छिड़ा युद्ध

युद्ध कैसे छिड़ा इसे लेकर कई तरह की विरोधाभासी जानकारी सामने आती हैं। पहले तेल अवीव से ये खबर आई कि मिस्र के विमानों और टैंकों ने इजरायल पर हमला कर दिया है। इसके साथ ही इजरायल के दक्षिणी हिस्से में लड़ाई की खबरें आने लगी थीं। लेकिन जानकारों का मानना है कि मिस्र के वायुक्षेत्र में इजरायली विमानों के आने की वजह से लड़ाई प्रारंभ हुई। मिस्र के सरकारी रेडियो ने इजरायल द्वारा हमला किए जाने की घोषणा की।  इजरायली विमानों ने कायरो पर हवाई हमला कर दिया था। कायरो में कई जगहों पर धमाकों के बीच एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया और आपातकाल की घोषणा की गई। सीरिया रेडियो से ये खबर प्रसारित हुई कि इजरायल ने उनके देश पर हमला कर दिया है। जॉर्डन ने भी मॉर्शल लॉ लगा दिया। इजरायल के खिलाफ युद्ध की घोषणा करने से पहले सीरिया ने अपनी सेना तो मिस्र के कमांड में देने का फैसला किया। सीरिया के साथ साथ इराक, कुवैत, सूडान अल्जीरिया, यमन और फिर सऊदी अरब भी मिस्र के समर्थन में कूद पड़े।

जब लड़ाई में कूदे दूसरे अरब देश
अरब देशों के लड़ाई में कूदने के बाद मामला और गहरा गया। इजराएल-जॉर्डन मोर्चे पर जबरदस्त लड़ाई चल रही थी। सीरियाई विमानों ने तटीय शहर हैफा को निशाना बनाया। तो जवाब में इजरायल ने दमिश्क एयरपोर्ट को निशाना बनाया। मिस्र और इजरायल लड़ाई में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। अरब देशों को यकीन था कि वो इस लड़ाई में इजरायल को जबरदस्त हार देंगे। लेकिन विश्व के नेता परेशान थे, पोप पॉल छठे ने कहा कि यरुशलम को मुक्त शहर घोषित कर देना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई। अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने सभी पक्षों से लड़ाई रोकने की अपील की। इजरायली सैनिकों ने गाजा के सरहदी शहर खान यूनिस पर हमला कर मिस्र और फिलिस्तीन के सैनिकों पर कब्जा कर लिया। इजरायल ने कहा कि उसने पश्चिमी सरहद को सुरक्षित कर लिया है। और उसकी सेनाएं दक्षिण हिस्से में मिस्र की सेना से मुकाबला कर रही हैं।

इजरायल ने कहा कि उसने मिस्र की वायुसेना को तबाह कर दिया है। लड़ाई के पहले ही दिन 400 लड़ाकू विमान मार गिराए गए जिसमें 300 विमान मिस्र के थे जबकि सीरिया के 50 लड़ाकू विमान शामिल थे। इस तरह लड़ाई के पहले दिन इजरायल ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। इजरायली संसद नेसेट की बैठक में पीएम लेविस एशकोल ने बताया कि सभी लड़ाई मिस्र में और सिनाई प्रायद्वीप में चल रही है। उन्होंने कहा कि मिस्र, सीरिया, जार्डन और सीरिया की सेनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है।
6 दिन की लड़ाई के बाद युद्धविराम
11 जून को युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए और लड़ाई खत्म हो गई। लेकिन इस जीत ने दुनिया को हैरान कर दिया था। इजरायली नागरिकों का मनोबल बढ़ा और अंतरराष्ट्रीय जगत में इजरायल की प्रतिष्ठा में इजाफा हुआ। 6 दिन तक चली लड़ाई में इजरायल के सिर्फ एक हजार सैनिक मारे गए लेकिन अरब देशों को करीब 20 हजार सैनिकों को खोना पड़ा। लड़ाई के दौरान इजरायल ने मिस्र से गाजा पट्टी और सिनाई प्रायद्वीप, जार्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम, सीरिया से गोलन हाइट की पहाड़ियों को छीन लिया। मौजूदा समय में सिनाई प्रायद्वीप मिस्र का हिस्सा है, जबकि वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी फिलिस्तीन के इलाके मे हैं।
यरुशलम भी है युद्ध की प्रमुख वजह
इन दोनों देशों के बीच जंग की एक प्रमुख वजह यरुशलम भी है। यरुशलम को दोनों देश अपनी राजधानी मानते हैं। पहले यह ईस्ट और वेस्ट यरुशलम के नाम से जाना जाता था लेकिन साल 1967 में इजरायल ने यरुशलम के काफी हिस्से पर कब्जा कर लिया ।तब से लेकर आज तक इजरायल ने यरुशलम के लगभग पूरे हिस्से पर कब्जा कर लिया है। यरुशलम की अल अक्सा मस्जिद इस्लाम धर्म के लोगों के लिए तीसरी सबसे पवित्र जगह है। इसके आलावा यरुशलम में मौजूद टेम्पल माउंट को यहूदी और ईसाई दोनों धर्म के लोग अपने लिए एक पवित्र जगह मानते हैं।

जब हुआ पहला अरब-इजराइल युद्ध
साल 1948 में अरब देशों मिस्र, जॉर्डन, इराक और सीरिया ने इजरायल पर हमला कर दिया। यह हमला फिलिस्तीन को बचाने के लिए नहीं बल्कि इजरायल के खात्मे के लिए था। दरअसल अरब देश यह मानते थे कि इजरायल विदेशी राज का एक नमूना है। अरब देश इस लड़ाई में हार गए थे। इस लड़ाई में आधा जेरुशलम शहर इजरायल के कब्जे में आ गया और फिलिस्तीनी नागरिक सिर्फ वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी तक ही सीमित रह गए। इस युद्ध के दौरान लगभग 7 लाख से ज्यादा फिलिस्तीनी बेघर हो गए।

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