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Make in India पर सरकार को बड़ी सफलता: पहली बार आयात से अधिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 

Make in India पर सरकार को बड़ी सफलता: पहली बार आयात से अधिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 

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by December 31, 2017 व्यापर

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालते ही मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने के भरपूर प्रयास किए हैं। मेक इन इंडिया के मोर्चे पर सरकार को एक बड़ी राहत मिली है। वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान देश में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रॉडक्ट्स का उत्पादन पहली बार आयात से आगे निकल गया। देश का सबसे अधिक विदेशी मुद्रा भंडार इलेक्ट्रॉनिक्स प्रॉडक्ट्स के आयात पर ही खर्च किया जाता है।

आयात से अधिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 
सूत्रों के मुताबिक 2016-17 में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 49.5 अरब डॉलर का हुआ, जोकि आयात पर खर्च 43 अरब डॉलर से अधिक है। सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। खासतौर पर स्मार्टफोन, अप्लायंसेज, सेट-टॉप बॉक्स और टेलिविजन आदि के उत्पादन पर जोर दिया गया है। इस क्षेत्र में आयात का बड़ा हिस्सा पड़ोसी देश चीन से आता है और भारत वित्तीय प्रोत्साहन और दूसरे कदमों से इसका मुकाबला करना चाहता है। हाल ही में मोबाइल फोन, सेट-टॉप बॉक्स, माइक्रोवेव ओवन्स और एलईडी लैंप्स जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क में वृद्धि की गई है।

उत्पादन में लगातार हो रही वृद्धि 
पिछले तीन वित्त वर्षों से स्थानीय उत्पादन में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जबकि आयात में कमी हो रही है। 2015-16 में स्थानीय उत्पादन 37.4 अरब डॉलर था, जबकि आयात 41 अरब डॉलर का हुआ। 2014-15 में 30 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का उत्पादन देश में हुआ और 37.5 अरब मूल्या का आयात विदेशों से हुआ था। सरकार डिजिटल कार्यक्रम में तेजी लाने पर जोर दे रही है और 2022 तक डिजिटल इकॉनमी का टर्नओवर 1 ट्रिल्यन डॉलर करने का लक्ष्य है। इस टारगेट को पूरा करने में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बड़े हिस्सेदार के रूप में देखा जा रहा है।

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