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रोहिंगयायी मुसलमान हैं, इस लिए भारत में नहीं मिलेगी शरण ?

रोहिंगयायी मुसलमान हैं, इस लिए भारत में नहीं मिलेगी शरण ?

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बर्मा से आ रहे रोहिंगयायी लोंगों का अपराध सिर्फ इतना है कि वह मुसलमान हैं। इस लिए भारत उन्हें शरण देना नहीं चाहता है वर्ना श्रीलंका के तमिल, अफगानिस्तानी सिखों और पाकिस्तानी हिंदुओं को शरण देने में कभी कोई आपत्ति नहीं हुई। मानवतावादी विचार धारा के लोग भी अब धर्म और जाति से मानव की पहचान कर रहे हैं। मुसलमान की पहचान आतंकवादी, गो भक्षक और देशद्रोही की बनाई जा रही है। इसलिए आसान निष्कर्ष ये है कि किसी पीड़ित मुसलमान के प्रति मानवीय सहानुभूति दिखाने का मतलब आतंकवाद का समर्थन करना है।
विश्व गुरु बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाला भारत अच्छी तरह जानता है कि दुनिया में ऐसा कोई शक्तिशाली, प्रभावशाली और इज़्ज़तदार देश नहीं है जिसने शरणार्थियों को जगह न दी हो। हालाँकि ये विश्व राजनीति का ट्रंप काल है जिसमें कमज़ोरों के ख़िलाफ़ आग उगलने को मर्दानगी समझा जाने लगा है।
सवा सौ करोड़ आबादी वाले भारत की पहचान दुनिया में इस लिए सबसे अलग रही है क्योंकि यहां अनेक जाति और धर्म के लोग सदियों से एक दूसरे के साथ मिल कर रहते आये हैं और जब भी ज़रूरत पड़ी सबने मिलकर मुल्क के खिलाफ उठने वाली आवाज़ का दमन किया है।परन्तु 2014 लोक सभा के चुनाव के बाद से देश वासियों को नये भारत का सपना दिखाया गया जिसे देखने की चाहत में मुल्क कहाँ जा रहा है यह किसी को पता नहीं है। इंसानियत और मानवता के मर्म को मार कर देश को खंडित करने और साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने का प्रयास किया जा रहा है। नौजवानों में पनपता कट्टरवाद आने वाली पीढ़ी के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा। जब इंसान का हृदय हर दुखी इंसान को देख कर तड़प उठता है बिना इस बात की पहचान किये कि पीड़ित किस धर्म का है, तो फिर हम अपने निजी स्वार्थ, अहंकार और सत्ता लाभ के लिए क्यों देश की धरोहर का विनाश कर रहे हैं। भारत सदियों से अपनी उदारता और गंगा जमुनी तहजीब के लिये दुनियां में जाना जाता है फिर रोहिंगयायी निरीह अनपढ़ बेसहारा लोंगों से नफरत क्यूँ ? वह यहाँ की नागरिकता नहीं मांग रहे हैं बल्कि उनका कहना है कि जब तक हालात ठीक नहीं हो जाते तब तक उनेह भारत में रहने दिया जाए। हालात सामान्य होते ही वह लोग अपने वतन को वापिस लौट जाएंगे। रोहिंग्यायी लोगों इस लिए भारत से निकालना कि वह मुस्लमान है, शर्मनाक और चिंताजनक है फिर भी भारत अगर इन लोगों निकलता है तो अंतर्राष्ट्रीय संधियों का उललंघन होगा। उसके बाद यह लोग कहाँ जायेंगे यह पता नहीं है ? Written By KD Siddiqui

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