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हजारों लोंगों से करोड़ों की ठगी करके महा ठग तरुन शिन फरार, सोता रहा नोयडा, पुलिस और प्रशासन

हजारों लोंगों से करोड़ों की ठगी करके महा ठग तरुन शिन फरार, सोता रहा नोयडा, पुलिस और प्रशासन

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नोयडा। निवेशकों का हजारो करोड़ रुपया लेकर प्रिमिय ग्रुप गायब हो गया और नोयडा,पुलिस और प्रशासन सोता रहा। वर्ष 2012 में नोयडा और एनसीआर में बड़े -बड़े होर्डिंग और बैनर लगा कर प्रिमिय ग्रुप के अध्यक्ष तरुण ने अपने आप को रियल स्टेट गुरु बताया और लोंगों से कॉरपोरेट सीटी बनाने का दावा किया। कोरपोरेट सिटी में विलाज, आफिस और दूकान बनाने का प्रचार प्रसार करके लोंगों से वादा किया गया कि 2017 में कम्पनी अपने प्रोजेक्ट को तैयार कर देगी। जब तक प्रोजेक्ट तैयार नहीं होता है तब तक कम्पनी ने निवेशकों को निवेश की गयी रकम पर ब्याज देने का वादा किया गया।

कम्पनी के लुभावने प्रचार और प्रचार के माध्यम से हजारों लोंगों ने कम्पनी में पैसा लगाया। किसी ने दूकान ख़रीदा तो किसी ने आफिस, लेकिन पांच साल तक जब कम्पनी ने निर्माण कार्य शुरू नहीं किया तो निवेशकों को झटका लगा और लोंगों ने कम्पनी के विषय में तहकीकात करना शुरू किया। जाँच में पता चला की नोयडा के सेक्टर ६२ प्रोजेक्ट की ज़मीन प्रिमिया समूह की है ही नहीं।

गौरतलब है की ठगी का अहसास होते ही निवेशकों ने थाना सेक्टर २० में शिकायत करना शुरू कर दिया लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस और प्राधिकरण की लापरवाही के कारण प्रिमिया समूह के निवेशकों ने धीरे – धीरे अपने कारोबार को समेट लिया और एक दिन अचानक सब गायब हो गये। अब प्रिमिया समूह का नोयडा कार्यालय पूरी तरह से बंद हो चुका है और कम्पनी के सभी निवेशकों और अधिकारीयों ने अपने – अपने फोन बंद कर लिए है।
निवेशक दो वर्षों से लगातार कम्पनी के खिलाफ प्रदर्शन करके कारवाई की मांग कर रहे हैं और पुलिस से तरुण को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं लेकिन नोयडा पुलिस कुम्भकरण की नींद से जागने को तैयार नहीं है, जिसके कारण पुलिस सवालों के घेरे में है।
निवेशकों का आरोप है कि पुलिस कम्पनी के साथ मिली हुई है और कम्पनी के निदेशकों को पुलिस बचाने का कार्य कर रही है। अगर ऐसा नहीं होता तो पुलिस थाने के सामने से कम्पनी का कार्यालय है और पुलिस को यह नहीं पता कि कम्पनी ने कब अपना कारोबार समेट लिया।

इसी क्रम में आज फिर निवेशकों ने थाना सेक्टर २० पर प्रदर्शन करके अपना आक्रोश ज़ाहिर किया और पुलिस से कम्पनी के निदेशकों को गिरफ्तार करने की मांग किया। पुलिस का रवैया कुल मिलाकर निराशाजनक रहा। पुलिस उलटा निवेशकों को धमकाती देखी गयी। निराश निवेशक थाना सेक्टर २० से पैदल मार्च करते हुए जिला अधिकारी के कार्यालय तक गये, जहाँ पर सिटी मजिस्ट्रेट ने निवेशकों से ज्ञापन लिया और महा ठग तरुन को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया।

निवेशक अधिकारीयों का आश्वासन लेकर निराश, उदास और उम्मीदों के सहारे धीरे – धीरे अपने घरों की तरफ चले गये और जाते – जाते पुलिस और प्रशासन को चेतावनी दे गये की अगले रविवार को फिर आएंगे और अगर कोई कार्रवाई नहीं हुयी तो यह शांतिपूर्वक चलने वाला प्रदर्शन उग्र भी हो सकता है।

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