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नोयडा के किसानों को क्यों नज़रअंदाज़ कर रहे हैं जनप्रतिनिधि ?

नोयडा के किसानों को क्यों नज़रअंदाज़ कर रहे हैं जनप्रतिनिधि ?

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नोयडा। उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक शहर को अपनी पुस्तैनी ज़मीन पर बसाने वाला किसान आज अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और सबसे दुःखद यह है कि उत्तर प्रदेश की सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधि कोई भी इनके विषय में सोचने और उनकी समस्या के समाधान के विषय में सोचता ही नहीं है।
पन्द्र से बीस साल पहले प्राधिकरण ने जिन किसानों की ज़मीनों को अधिग्रहित कर लिया लेकिन  आज तक वह लोग बढे हुए मुआवज़े और आबादी के भूखंड के लिए प्राधिकरण का चक्कर लगा रहे हैं। किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही संस्था भारतीय किसान यूनियन नौ दिन से नोयडा प्राधिकरण के सामने प्रदर्शन कर रहा है लेकिन प्राधिकरण उनकी समस्या को सुनने को तैयार नहीं है। जबकि एक साल पहले प्राधिकरण के अधिकारीयों ने किसानों को आश्वासन दिया था की जल्द से जल्द समस्याओं का समाधान कर दिया जायेगा लेकिन कुछ नहीं हुआ।
बिल्डरों के खरीदारों की समस्याओं के समाधान के लिए आनन फानन में प्रदेश सरकार ने कमेटी का गठन कर दिया और ज्यातर समस्याओं का हल निकाल भी लिया गया। अभी कुछ दिनों पहले सूबे के मुखिया योगी जी जिला ग़ाज़ियाबाद में आये थे लेकिन वहां से उनेह नोयडा की किसान के दर्दभरी आवाज़ नहीं सुनाई दी।
जानकारों का कहना ही कि किसानों से जनप्रतिनिधियों की बेरुखी का कारण नोयडा का शहरीकरण है। लाखों की संख्या में बाहरी लोगों के प्रवास के कारण नेताओं का रुझान किसानों की अपेक्षा शहरी लोगों की तरफ ज्यादा बढ़ रहा है और किसानों का संगठित न होने के कारण संघर्ष कर रही संस्थाओं को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। जिसके कारण सरकार और विभाग हर प्रदर्शन को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

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