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कभी टोपी न पहनने वाले मोदी, क्या गुजरात चुनाव के लिए बहादुर शाह की मजार और मस्जिद तक गए?

कभी टोपी न पहनने वाले मोदी, क्या गुजरात चुनाव के लिए बहादुर शाह की मजार और मस्जिद तक गए?

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जिस देश का अन्नदाता अपने अधिकारों से वंचित हो, कर्ज के बोझ से कराहता किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो, बेरोजगार नौजवान रोजगार की तलाश में सड़कों पर धूल फाँक रहा हो, बेटियां और मासूम बच्चे अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हों, दलितों और मुसलमानों की सरे राह पीट पीट कर हत्या की जा रही हो, मानव अधिकारों का का उललंघन हो रहा हो, आये दिन रेल हादसे में सैकड़ों लोग जान गवां रहे हों। उस देश के पीएम को सिर्फ चुनावी फायदे के लिए जनता को लॉलीपॉप देना शर्मनांक है। 2017 में घोषणा हुयी 2022 में सिर्फ गुजरात में बुलेट ट्रेन चलेगी। जबकि अभी मेट्रो ट्रेन नहीं चली है।

केन्द्र सरकार की हर योजना अब 2022 में पूरी होगी . इस बात पर गौर करियेगा- २०२२ का मतलब बड़ा स्पष्ट है कि २०१९ में पुनः जिताइये नहीं तो सपना, सपना ही रह जायेगा। इसका मतलब यह है कि नकली डिग्री लेकर जनता को धोखा देकर सत्ता के शिखर तक पहुँचने वाले नेता देश की सवा सौ करोड़ जनता को मूर्ख और अनपढ़ समझते हैं।

अभी पन्द्र लाख का इंतज़ार देश कर रहा है, पहले उसका भुगतान कर दो। नोटबंदी से जो कालाधन आया उसको भी बता दो।
महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ पर क्या किया जनता जानना चाहती है ? हिन्दू हित की बात करने वाले बताओ राम मंदिर का क्या हुआ ? कितने युवाओं को रोजगार दिया ? शिक्षा और मेडिकल माफियाओं के खिलाफ क्या किया। जीवन रक्षक उपायों के लिए क्या किये बताएं ?
सबसे निचले स्तर पर जीवन यापन कर रहे ग़रीबों और मजदूरों के लिए क्या किया ? मजदूरों को जनधन के नाम पर ठग लिया। खाता खुलवाने से जो करोड़ों रुपया इकठ्ठा हुआ उसे अडानी को दे दिया। ठीक है, अब उसका ब्याज तो लौटा दो।

पहले टोपी नहीं पहना यह दिखाने के लिए की तुम कटटर हिन्दू हो और अब गुजरात में चुनाव है तो मुसलमानों को लुभाने के लिए बहादुर शाह की कब्र पर फूल चढाने और वोट की खातिर मस्जिद की सैर पर निकल पड़े। कहाँ है तुम्हारा हिन्दुवाद ? यह न हिन्दू हैं और न मुसलमान बल्कि यही लोग असली देशद्रोही हैं जो देश की जनता को खंडित करके सियासत करते हैं। जाति और धर्म के नाम पर नफरत फैलाते हैं। साम्प्रदायिक दंगे करवाते हैं।

देश का हिन्दू और मुसलमान शांतिपूर्वक अपना जीवन यापन कर रहा है लेकिन जब चुनाव आता तो एक दूसरे को संदेह की नज़र से देखने लग जाते हैं। हर सुख और दुःख में सदैव साथ रहने वाले देश के नागरिकों को संघ और भाजपा ने टुकड़े कर दिए सिर्फ इस लिए कि सत्ता के सर्वोच्च आसन पर आसीन हो सकें।ऐसी हुकूमत जिहके सत्तासीन होने से देश में अशांति फ़ैल जाए, लोग एक दूसरे से नफरत करने लग जाएँ , जाति और धर्म के नाम दंगे होने लग जाएँ, किसान आत्महत्या करने लग जाएँ, और युवा रोज़गार की तलाश में दूसरे मुल्कों में पलायन करने लग जाएँ ऐसे शासक से देश के विकास की उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए और देश की जनता को संगठित होकर इसे सत्ता से उखाड़ फेंकने का संकल्प लेना चाहिए।

किसी भी देश के विकास के लिए सामाजिक संतुलन बनाये रखना और जनता से संवाद करना बहुत ज़रूरी है। अगर सरकार जनता से बिना संवाद किये जनता की भावनाओं के विपरीत कार्य करेगी और तानाशाही ढंग से बोलने पर प्रतिबंध लगाएगी तो जनता के अंदर विद्रोह की भावना पनपने लगती है जिसका दूरगामी परिणाम विनाशकारी होता है।
केंद्र में भाजपा के आने के बाद से भय का माहौल पैदा किया जाने लगा है। लेखकों, पत्रकारों और बुद्धिजीविओं की हत्या करवाकर उनके अंदर खौफ पैदा किया जाने लगा है, मिडिया के बड़े -बड़े घरानों को मुंहमांगी क़ीमत पर खरीद लिया गया है। यह लोकतंत्र की हत्या है। सरकार चाहती है आप वही बोलो जो वह बोलने के लिए कहे, आप वही लिखो जो सरकार चाहती है। देश की जनता को मनगढ़ंत खबरों और पेड़ न्यूज़ को दिखाकर भर्मित किया जा रहा है।

सरकार का सहयोगी संगठन संघ के अनुसार देश में उसके अलावा किसी को बोलने का अधिकार नहीं है। देश के नागरिकों को राष्ट्रवाद का प्रमाण पत्र देने का अधिकार संघ के पास है। जंगे आज़ादी में अंग्रेजों का मुखबिर, गाँधी जी के हत्यारे आज देश को राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा रहे हैं। 2014 में बनी भाजपा की सरकार के बाद से गऊ हत्या के नाम पर जितनी भी हत्याएं हई संघ ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्षरूप से टीवी चैनल पर हत्यारों का समर्थन किया। बम्ब ब्लास्ट और दंगे के आरोपियों को जेल से बाहर निकाल कर यह दिखाने का प्रयास है कि संघ कटटर हिंदूवादी संगठन है और वह हिन्दुओं के हितों के लिए सोचते हैं और कार्य कर रहे हैं। जिससे देश के सौ करोड़ हिन्दुओं का विश्वास हासिल कर सकें। अब वक़्त आ गया है जब संघ को यह बताना चाहिए कि 125 करोड़ में 25 करोड़ मुसलमानों को छोड़कर सौ करोड़ हिन्दुओं के लिए क्या किया ? और देशवासियों को सवाल पूछना चाहिए।

मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि संघ और भाजपा ने देश मुसलमानों के साथ कम बल्कि देश के हिन्दुओं के साथ ज्यादा छल किया है। जिसकी समझ देश के नागरिकों को बाद में आएगी। कुछ तथाकथित हिंदू और मुस्लिम कटटरपंथियों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए देश के नागरिकों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए देश को बीस साल पीछे धकेल दिया और 2019 में यही कामयाब हथियार हिन्दू बनाम मुस्लिम का पुनः उपयोग करने की योजना पर कार्य चल रहा है।

अब हमें अपने बुद्धि और विवेक से काम लेना होगा और विचार करना होगा की सदियों से एक साथ रह रहा इस देश का मुसलमान हिन्दुओं का दुशमन है या फिर हिन्दू मुसलमानो का ? या फिर यह कटटरवादी संगठन और राजनैतिक दल दोनों का।
वोट की सियासत देखिये पकिस्तान से पलायन करके आये हिन्दू परिवारों को राजस्थान में एक जंगल में ठहराया गया है इस लिए की वह लोग भील समुदाय से आते हैं जिसे अछूत माना जाता है। उनके लिए श्मशान घाट नहीं है, शौचालय नहीं है (हाईकोर्ट के आदेश पर एक वैन मिली है ) बच्चों को शिक्षा नहीं दी जा रही है, वहां पर सामान महंगा बेचा जाता है, सड़ी हई सब्जियां बेचने के लिए वहां भेजी जाती है. मतलब की उनके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार सरकार कर रही है।

अब संघ का दोहरा चरित्र देखिये दुनिया में हिंदुत्व की रक्षा के नाम पैसा बटोरने वाली संस्था को उनसे कोई सरकार नहीं है। वहीँ दूसरी तरफ बर्मा से आये रोहिंग्यायी मुस्लिमों को देश में शरण देने पर संघ को आपत्ति इस लिए है क्यूंकि वह मुस्लमान है.और तर्क है हमारे देश के नौजवान बेरोजगार हो जायेंगे और यह लोग आतंकवादी हैं।

तिब्बतियों को बसाया, लंकाईयों को बसाया, नेपालियों को बसाया, अफगानिस्तानियों को बसाया, पंजाबियों को बसाया, दलाईलामा को बसाया,पारसियों को बसाया और न जाने कहाँ – कहाँ से लोग आकर भारत में रह रहे हैं। कोई आपत्ति नहीं लेकिन बर्मा से आये लोगों से आपत्ति है सिर्फ इस लिए कि वह लोग मुसलमान हैं और देश को दिखाना है कि हम मुस्लिम विरोधी हैं और हिन्दुओं के हितों के लिए कार्य कर रहे हैं जो कि सिर्फ अफवाह है और देशवासियों गुमराह किया जा रहा है।

इन नादानों को नहीं पता कि मुहल्ले में जब हिन्दू का घर जलता है तो मुसलमान पानी लेकर दौड़ता है और मुसलमान का घर जलता है तो हिन्दू। अरे बंद करो हिन्दू और मुसलिम का खेल। शुरू करो देश के विकास की बात, शिक्षा की बात, रोज़गार की बात, जीवन बचाने की बात और आपसी सद्भाव और भाईचारे की बात जिससे की देश की एकता को इतना मजबूत किया जाये कि दुनिया में भारत एक शक्ति बन कर उभरे और दुश्मन को भारत की तरफ आँख उठाने से पसीना आये।

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