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पण्डित मदन मोहन मालवीय की आत्मा रो रही होगी. बीएचयू के हालात देख कर

पण्डित मदन मोहन मालवीय की आत्मा रो रही होगी. बीएचयू के हालात देख कर

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वाराणसी। काशी हिन्दू विश्व विद्यालय की घटना से पूरे देश को दुनियां में शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जिस संस्थान के छात्रों ने देश का नाम दुनियां में रौशन किया है, आज उसी संस्थान के कुछ शरारती छत्रों की करतूत से देश का सर शर्म झुक गया है। पंडित मदन मोहन की आत्मा आज बीएचयू के हालत को देख कर रो रही होगी।
इस समय देश कठिन दौर से गुज़र रहा है, जब शिक्षण संस्थानों के कारण देश हालात बिगड़ने लग जाएँ तो समझ लेना चाहिए कि स्थिति अब भयावह हो रही है। आवश्यकता है कि सरकार ऐसे मामलों की तत्काल जांच करवा कर दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजे जिससे कि शिक्षा के मंदिर की गरिमा बनी रहे और छात्र और छात्राएं अपने आपको सुरक्षित महसूस करें।

भय के वातावरण से भयभीत हो रहा है युवा
देश के जाने माने शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रविरोधी बताना और छात्राओं पर लाठी चलवाना एक कुंठित मानसिकता को दर्शाता है। क्रूर से क्रूर हुक्मरान भी रात्रि के समय शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही लड़कियों पर लाठी चलवाने से पहले दस बार सोचेगा लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार और प्रशासन ने यह निर्णय कैसे लेलिया यह अपने आप में एक अनसुलझा सवाल है।
छात्र और छात्राओं को अगर कालेज और यूनिवर्सिटी जाते समय भय लगेगा तो देश का भविष्य अन्धकार मय हो जाएगा। बीएचयू की बालिकाओं में आज इतना भय व्याप्त है कि वह अपना सामान लेकर अपने – अपने घरों को जा रही हैं। गांव से माँ बाप फोन कर के कह रहे हैं कि बेटा वापिस चले आओ हमें नहीं पढ़ाना अपने बच्चे को ऐसे संस्थान में जहाँ हमारे बच्चों की अस्मिता और जीवन सुरक्षित न हो।

बीएचयू में यह सब होता है, नहीं जानते थे
लड़कियों के परिजनों का कहना है कि हम लोग नहीं जानते थे बीएचयू में यह सब होता है। नहीं तो हम लोग अपने बच्चों को कभी नहीं भेजते। हम अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार सिखने के लिए भेज रहे हैं न कि लाठियां खाने और इज़्ज़त लुटवाने के लिए। अगर हम लोगों को पता होता कि वहां पर यह सब होता है तो हम लोग अपने बच्चों को कभी नहीं भेजते बीएचयू में।

गुंडों और बदमाशों का अड्डा है बीएचयू
बीएचयू को पूर्वांचल के अपराधियों का गढ़ भी कहा जाता है। वहीँ से युवा अपराध की दुनियां में और वहीँ से सियासत और वहीँ देश को संवारने वाले विद्वान और बुद्धिजीवी भी पैदा हुए हैं।
टीवी और अखबार के माध्यम से बीएचयू के हालात को जब लोग पढ़ रहे हैं, तो अब लोगों को हैरानी हो रही है कि क्या कालेज और यूनिवर्सिटी में भी ऐसा होता है। अगर कालेज और यूनिवर्सिटी में यह सब होता है तो हम अपने बालकों को पढ़ने के लिए कहाँ भेजें ?
बीएचयू की घटना ने देशवासियों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। लोगों का कहना है कि देश के जाने – माने शिक्षण संस्थान में लड़कियों को छेड़ा जाता है, उनके कपडे फाड़े जाते हैं और उनके सामने छात्र हस्तमैथुन करते हैं। इस तरह की घटना तो किसी असभ्य समाज में ही होती होगी लेकिन शिक्षण संसथान में अगर हो रही है तो इससे ज्यादा चिंता का विषय और कुछ नहीं हो सकता है।

प्रधान मंत्री बेटी बचाओ का नारा झूठा
ख़ास तौर से पूर्वांचल के लोगों का प्रधान मंत्री मोदी के प्रति ख़ासा आक्रोश है। लोगों का कहना है की बीएचयू में घटना के बाद जब कार्रवाई नहीं हुई तो लड़कियों ने अगर पीएम से मिलने के लिए हठ किया तो पीएम को सहर्ष और तत्काल उनसे मिलना चाहिए था। चूँकि वह बनारस में ही थे, और जब उसी रस्ते से आपको निकलना था तो दो मिनट के लिए अगर गाडी रुकवा कर लड़कियों से मिल लेते तो शायद इस समस्या का सदा के लिए निदान हो जाता और जो कुछ हो रहा है, वह नहीं होता, लेकिन प्रधान मंत्री ने रास्ता बदल कर और बालिकाओं से न मिलकर अपनी मानसिकता को जगजाहिर किया है।

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