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शर्मनांक : जब नहीं मिली एम्बुलेंस तो पत्नी के शव को कंधे पर लाद कर निकल पड़ा शादिक

शर्मनांक : जब नहीं मिली एम्बुलेंस तो पत्नी के शव को कंधे पर लाद कर निकल पड़ा शादिक

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गुलिस्तां, नेटवर्क।

लखनऊ। मानवता विलाप कर रही थी। बदबूदार व्यवस्था कुम्भकर्ण की नींद सो रही थी। प्रदेश के मुखिया कर्नाटका चुनाव प्रचार में गए हुए थे और प्रधान सेवक भारत को पैरिस बनाने का सपना दिखा रहे थे। जब दुनियां में अपनी पहचान बना चुके शहर कन्नौज के जिला अस्पताल के बाहर एक ग़रीब व्यवस्था से ठुकराया हुआ एम्बुलेंस के अभाव में अपनी पत्नी की लाश को कंधे पर लेकर उदास, निराश और बेसहारा अपने गांव के निकल पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों के बेरुखी के शिकार शादिक अपनी पत्नी की लाश को लेकर जब अस्पताल से बाहर निकला और कुछ दूर ही गया होगा कि सड़क पर चल रहे इंसानों की इंसानियत जागी। उसे रोका और मामले को समझने बाद लोगों ने चंदा करके वाहन का इंतज़ाम किया जिससे शादिक अपनी पत्नी के शव को अपने गांव ले गया। सड़क पर चल रहे लोगों के अंदर का इंसान जाग गया लेकिन लाखों रुपया का वेतन लेने वाले व्यवस्था के ठेकेदारों का ज़मीर नहीं जागा।

इंसानियत को शर्मिंदा करने वाला यह मामला थाना मूसाझाग ग्राम मझारा निवासी शादिक का है जो अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आया था जहाँ विभागीय लापरवाही के कारण उसकी मौत हो गयी। शादिक ने शव को ले जाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से एम्बुलेंस की मांग किया परन्तु मगरूर अधिकारी ने एम्बुलेंस देने से मना कर दिया।

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