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राहुल गाँधी के प्रधान मंत्री बनने की सहमति मात्र से भाजपा में बेचैनी

राहुल गाँधी के प्रधान मंत्री बनने की सहमति मात्र से भाजपा में बेचैनी

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नई दिल्ली। कर्नाटक विधान सभा चुनाव में प्रचार के दौरान राहुल गाँधीने मिडिया से वार्तालाप करते हुए कहा था की मुझे प्रधान मंत्री बनने में कोई परेशानी नहीं है। राहुल गाँधी के इस ब्यान से राजनितिक गलियारे में बेचैनी बढ़ गयी है। खास तौर से भारतीय जनता पार्टी ककुछ ज्यादा ही बेचैन दिखाई दे रही है। आज प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली में राहुल गाँधी के प्रधान बनने के ब्यान का मखौल उड़ाया।

राहुल गाँधी के बयान का मोदी द्वारा जवाब देने मात्र से राहुल का कद बढ़ जाता है और इस बात का प्रमाण है कि प्रधान मंत्री मोदी भी राहुल गाँधी से भयभीत है। मोदी की कुर्सी को अगर कोई छीन सकता है तो वह है कांग्रेस पार्टी। आज़ादी के बाद से देश पर सबसे ज्यादा राज्य करने वाली पार्टी कांग्रेस ने लुटे -पिटे भारत को सत्तर वर्षों में आर्थिक और सामजिक रूप से मजबूत करने का काम किया है लेकिन भाजपा ने झूठ बोल कर जनता को भर्मित किया की कांग्रेस ने कुछ नहीं किया और जनता झूठे और लुभावने वादों के जाल में फंस गयी लेकिन भाजपा के शासन काल में देश की जनता ने देख लिया कि भाजपा झूठे और मक्कार लोगों की पार्टी है। इन्होने देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से कमज़ोर करने का कार्य किया है। इस लिए अब जनता का मोह भाजपा से भांग हो रहा है।

आज प्रधान मंत्री ने कहा कि “एक आया और कहने लगा कि मैं प्रधान मंत्री बनूंगा” इस क्या अर्थ लगाया जाए कि प्रधान मंत्री बनने का अधिकार सिर्फ मोदी के पास है। दूसरा कोई प्रधान मंत्री बनने का सपना नहीं देख सकता ? जब चाय बेचने वाला प्रधान मंत्री बन सकता है तो एक राष्ट्रीय राजनैतिक दल का अध्यक्ष पीएम क्यों नहीं बन सकता ?

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