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केरल: धर्म परिवर्तन करके शादी करने वाले जोड़े ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खट खटाया

केरल: धर्म परिवर्तन करके शादी करने वाले जोड़े ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खट खटाया

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एजेंसी। केरल के नवविवाहिता जोड़े की मुसीबते काम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मामला दो धर्मों का होने के कारण विवाद न्यायालय तक पहुँच गया है। आज देश की सर्वोच्च अदालत ने केरल की हाईकोर्ट से पूछा है कि क्या बालिग नौजवान की शादी क्या इस लिए रद्द की जा सकती है कि लड़की ने धर्म परिवर्तन कर के शादी किया है?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह अगले सोमवार को इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या उच्च न्यायालय रिट अधिकार के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करके एक मुस्लिम युवक की उस हिन्दू महिला से शादी को अमान्य घोषित कर सकता है, जिसने निकाह करने से पहले इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि केरल के मुस्लिम युवक शफीन जहां की नई अर्जी पर नौ अक्तूबर को विचार किया जायेगा। इस अर्जी में शफीन ने न्यायालय से अपना पहले का आदेश वापस लेने का अनुरोध किया है जिसमे राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को यह पता लगाने के लिये कहा गया था कि क्या इस मामले में कथित ‘लव जिहाद’ का व्यापक पैमाना है।
शफीन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने दलील दी कि बहुधर्मी समाज में शीर्ष अदालत को इस मामले की राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को जांच का आदेश नहीं देना चाहिए था। उन्होंने इस आदेश को वापस लेने के लिये दायर अर्जी पर शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया। इस पर पीठ ने कहा, ‘सवाल यह है कि क्या उच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 में प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करके शादी अमान्य घोषित कर सकता है।’

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