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विरोध: लाल किले को निजी हाथों में देने के सरकार के फैसले के खिलाफ सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन

विरोध: लाल किले को निजी हाथों में देने के सरकार के फैसले के खिलाफ सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन

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by May 10, 2018 दिल्ली
गुलिस्तां, नेटवर्क।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लाल किले की देख भाल का ज़िम्मा एक निजी कम्पनी के हाथों में देने के विरोध में आज सामाजिक संगठनों ने लाल किले सामने विरोध प्रदर्शन किया। लाल किले के सामने सैकड़ों की संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और छात्रों ने सरकार की नीतिओं का विरोध किया। लोगों का कहना है कि यह भाजपा की सरकार जनविरोधी कार्य कर रही है और देश की जनता का पैसा निजी कंपनियों को लुटा रही है। इससे जनता का नहीं बल्कि निजी कंपनियों का फायदा होगा।

मुगल शासकों द्वारा बनाया गया लाल किला देश की धरोहर है। इस से प्रति वर्ष करोड़ों रुपया सरकार को राजस्व मिलता है परन्तु अब वह पैसा सरकार के बजाय निजी हाथों में जायेगा जिससे छुपे तौर पर राजनितिक संगठनों और कम्पनी का फायदा होगा। जिस निजी कम्पनी को देख भाल का ठेका दिया गया है उसने प्रवेश शुल्क दो गुना बढ़ा दिया है, जिससे आम आदमी के लिए अब लाल किला देख पाना मुश्किल हो गया है।

लाल किले के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया की सरकार लाल किले को निजी हाथों में दे कर छुपे तौर पर कम्पनी से करोड़ों की उगाही करेगी जिसका पता लगाना किसी भी संस्था के लिए मुश्किल होगा।

सूत्रों के अनुसार लाल किले को निजी कम्पनी के हाथ में देने से पहले भाजपा का समझौता हुआ है, जिसके अंतर्गत कम्पनी कमाई का कुछ हिस्सा भाजपा को देती रहेगी।

मोदी सरकार में भ्र्ष्टाचार का यह आधुनिक तरीका है। इस आधुनिक तकनिकी द्वारा भ्र्ष्टाचार करने पड़ किसी भी जाँच एजेंसी के लिए सुबूत इकठ्ठा कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा।

लाल किले की देख रेख का ज़िम्मा निजी हाथों में देने के पीछे भाजपा के इस खेल को जनता समझ नहीं पा रही है और पार्टी २०१९ चुनाव के लिए भ्र्ष्टाचार कर के धन इकठ्ठा कर रही है।

विरोध प्रदर्शन में मौजूद लोगों ने सरकार की नीतिओं का विरोध किया और संकल्प लिया कि जब तक सरकार लाल किले का अनुबंध निरस्त नहीं करेगी तब तक यह विरोध प्रदर्शन ज़ारी रहेगा।

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