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चुनावों में सभी दलों को चोर और डाकू कहने वाले मोदी को अमित शाह के बेटे के घोटाले पर कैसे सांप सूंघ गया?

चुनावों में सभी दलों को चोर और डाकू कहने वाले मोदी को अमित शाह के बेटे के घोटाले पर कैसे सांप सूंघ गया?

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दिल्ली। लोकसभा चुनाव वर्ष २०१४ के प्रचार को आप याद करेंगे तो पाएंगे की प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार मोदी लगभग सभी बड़ी पार्टी को देश की जनता के सामने चोर, लुटेरा और न जाने क्या -क्या कहा था। मोदी ने कांग्रेस पार्टी को देश का सबसे बड़ा लुटेरा बताया और देशवासियों के सामने ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर यह साबित किया की सत्तर साल तक देश पर हुकूमत करने वाली पार्टी कांग्रेस ने भारत को खोखला बना दिया।
मोदी के प्रचार के दौरान एक नई परम्परा की शुरुआत हई। मोदी ने सोनिया और राहुल गाँधी के निजी मामलों पर तो हमला किया ही साथ ही उनके रिश्तेदारों को भी नहीं छोड़ा। देश की जनता जो लबे समय से कांग्रेस के शासन से ऊब चुकी थी उसे भी मोदी के भाषणों से ऐसा लगने लगा की अगर बदलाव होगा तो शायद कुछ नया हो।

कांग्रेस पार्टी ने क्या दिया ?
मुग़लों और अंग्रेजों के लूटने के बाद भारत को संवारने का कार्य कांग्रेस पार्टी ने किया। पूरे देश में चरों तरफ फैली गरीबी और भुखमरी, न रोजगार के साधन, न इलाज के इए अस्पताल, न शिक्ष्ण संसथान, न सडकें और ही उद्योग और उसे चलने के लिए बिजली। कांग्रेस के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती थी देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने की। कांग्रेस पार्टी ने अपनी सूझ बुझ और अनुभवी नेतावों और मंत्रियों के अथक प्रयास से आज देश को आर्थिक और सामाजिकरूप मजबूत करके जहाँ भारत को दुनियां के विकासशील देशों की कतार में खड़ा कर दिया वहीँ देश के नौजवानों को रोजगार के नये -नये अवसर दिए।

कम्प्यूटर और मोबाईल की क्रांति कांग्रेस की ही देन है। आईटी के क्षेत्र में भारतीय नौजवानों ने पूरी दुनिया में भारत का नाम रौशन किया। भारत के गांवों और शहरों में अस्पताल और मेडिकल कालेजों की स्थापना किया। देश को आइआइएम और आई आई टी दिया। कोयला और डीजल इंजन की जगह पर बिजली से चलने वाली शताब्दी जैसी तीव्र गति वाली रेलगाड़ियों को देश को समर्पित किया। दुनिया में भारतीय कामगारों की मांग बढ़ने लगी। सिविल, सोफ्टवेयर और हार्डवेयर इंजीनयरों की मांग दुनिया में तेजी बढ़ी।

भारत के गांव -गांव में बिजली पंहुचाया। बिजली की मांग को देखते हुए देश के अनेकों राज्यों में बिजली उत्पादन करने के संयंत्र लगाये।
किसानों को आधुनिक मशीनरी के उपयोग के गुण सिखाये और सस्ते दामों पर कृषि उपयोगी मशीनरी को उपलव्ध कराया जिसके कारण आज भारत के किसानों की आमदनी में बढ़ोत्तरी हई और देश का अन्नदाता सर उठा कर चलने लगा। कांग्रेस के शासनकाल में देश आर्थिक और सामाजिक से मजबूत हुवा और सर्वत्र विकास हुआ।

मोदी ने देश को बीस साल पीछे धकेल दिया
मोदी के सत्ता में आते ही जहाँ देश का सामाजिक संतुलन बिगड़ गया वहीँ देश आर्थिकरूप से कमज़ोर होने लगा। बेरोज़गारी और मांगे अपने चरम पर पहुंची। मोदी की केंद्र सरकार ने प्रोपर्टी उद्योग को जहाँ नस्त नाबूद कर दिया वहीँ उससे जुड़े लाखों लोग बेरोजगारी और भुखमरी के शिकार हुए हैं। जिस मोदी ने देश को बताया की सत्तर साल में कांग्रेस ने देश को खोखला कर दिया उसी के संसाधनों के बल पर मोदी ने चुनाव जीता।
जब देश मोदी के हाथ लगा तो तीन साल में मोदी ने पूरे देश को उद्योगपतियों के हाथ में बेच दिया। जगह -जगह किसान आत्महत्या करने लगे। नौजवानों में बढती बेरोज़गारी के कारण निराशा और उदासी बढ़ने लगी।
मोदी की केंद्र सरकार ने सरकारी खजाने का मुंह देश के जाने – माने उद्योगपतियों के लिए खोल दिया और उनसे उगाही के लिए अपने सहयोगी संगठनों जैसे संघ आदि को लगा दिया।
जब देश की जनता पन्द्रह लाख की उम्मीद में आस लगाये बैठी थी तो उसी समय केंद्र सराकर ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे कानून बना कर देश छोटे और मझोले व्यापारियों की कमर तोड़ दिया। देश की जनता को अपने ही पैसों के लम्बी कतारों में लग्न पड़ा, पुलिस की लाठियां खानी पड़ी। जिसमें कई लोंगों की जान भी चली गयी। जनता ने जब चुनावी वादों की बात किया तो उनके सहयोगी और भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा की वह तो चुनावी जुमला था अर्थात अप्रत्यक्षरूप से यह स्वीकार किया कि देश की जनता को बेवकूफ बनाया गया।

मिडिया की चुप्पी और फर्जी खबरों की बाढ़

केंद्र में भाजपा की सराकर आने के बाद से सबसे पहले मोदी ने संचार के माध्यमों को अपने वश में कर लिया अर्थात उनेह खरीद लिया गया। देश में पहली बार ऐसा हुआ की देश की मिडिया से जनता का विश्वास उठ गया। मिडिया ने हर उस खबर को ब्रेकिंग बनाया जिसके लिए उसे पैसा मिला, लेकिन सामाजिक सरोकार की खबरों को एक दम से नज़र अंदाज़ कर दिया गया। देश में राष्ट्रवाद बनाम राष्ट्र विरोधी की एक नयी बहस मिडिया ने शुरू कर दिया। देश के मरते हुए किसान और बढती हई बेरोजगारी पर बहस न करके मिडिया ने राष्ट्रवाद और राष्ट्रद्रोही पर चौपाल लगाना शुरू कर दिया गया।
मिडिया के लोंगों ने दलाली की पराकाष्ट पार कर लिया और अपने पत्रकारों को मोदी के सामने दुम हिलाने के लिए छोड़ दिया, और पत्रकारों से प्रधान मंत्री से सवाल करने के अधिकार छीन लिया गया। बोलने की आज़ादी पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। बोलने का अधिकार उसी के पास है जो साहब की गुलामी को स्वीकार कर ले अन्यथा बोलने वाले पर देशद्रोह का ठप्पा लगा दिया जायेगा।
मोदी की चुप्पी
गला फाड़ -फाड़ कर दूसरों पर आरोप लगाने वाले प्रधान मंत्री मोदी के अजीज मित्र अमित शाह के बेटे पर जब कम्पनी में घोटाले का आरोप लगा तो मोदी को पसीना आ गया। क्यूंकि उनेह उम्मीद नहीं थी कि उनके खिलाफ कोई अवाजा उठाएगा। आरोप लगाने पत्रकार पर मानहानि का मुकदमा करने की धमकियां दी जा रही हैं और सारे मंत्री और भाजपाई अमित शाह के बेटे के बचाव में जगह जगह बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं लेकिन दूसरों पर आरोप लगाने वाले प्रधान मत्री चुप्पी साधे हुए।
देश की जनता के सामने अब मोदी बेनकाब हो चुके हैं,और देश की जनता जुमले के हिसाब किताब के लिए वर्ष २०१९ का इंतजार कर रही है।

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