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मुज़फ्फरनगर : फेसबुक पर “गंगा” पर टिप्पड़ी के कारण ज़ाकिर को 42 दिन जेल में रहना पड़ा

मुज़फ्फरनगर : फेसबुक पर “गंगा” पर टिप्पड़ी के कारण ज़ाकिर को 42 दिन जेल में रहना पड़ा

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नई दिल्ली। “गंगा जीवित” हैं तो क्या किसी के डूबने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी जैसे मुद्दों पर बोलने पर ज़ाकिर अली त्यागी को 42 दिन जेल में गुज़ारना पड़ा। यह लोकतंत्र की हत्या नहीं है तो क्या है। ज़ाकिर अली त्यागी ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा था कि भाजपा राम मंदिर कभी नहीं बनवाएगी यह सिर्फ वोट पाने के लिए दोनों समुदायों को भड़का रही है।

जाकिर के खिलाफ दायर एफआईआर में उसके फेसबुक पोस्ट का जिक्र है। एफआईआर के मुताबिक जाकिर ने फेसबुक में लिखा है कि अब जब गंगा को जीवित ईकाई का दर्जा दे दिया गया है तो क्या अगर किसी शख्स की उसमें डूब कर मौत होती है तो गंगा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के मुताबिक इस पोस्ट राम मंदिर के बारे में भी लिखा गया था। पोस्ट में लिखा गया कि ‘राम मंदिर निर्माण का वादा महज मजाक है और इसे अगले बार चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए फिर से किया जाएगा, जैसा कि वे मुल्लों को पाकिस्तान भेजने का वादा करते हैं।’ मेरठ के स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी से बीए कर रहे जाकिर ने कहा कि इस घटना के बाद उसने फेसबुक पर अपनी सक्रियता कम कर दी है।

इन टिप्पणियों को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने आपराधिक मानते हुए 18 वर्षीय जाकिर अली त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। जाकिर ने बताया कि उसको खतरनाक अपराधियों के साथ 42 दिन मुजफ्फरनगर की जेल में गुजारने पड़े जहां उसे शौचालय का इस्तेमाल करने तक के लिए भी पैसे चुकाने पड़ते थे। जाकिर को दो मई 2017 को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 ( धोखाधड़ी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (कंप्यूटर संबंधित अपराध) की धारा 66 के तहत आरोप तय किए गए।

जाकिर के वकील काजी अहमद ने पीटीआई-भाषा को बताया कि उसे 42 दिन के बाद जमानत पर रिहा किया गया लेकिन पुलिस ने अपने आरोप-पत्र में राजद्रोह से संबंधित धारा 124ए भी जोड़ दी है। जाकिर ने अपनी यह व्यथा भारतीय प्रेस क्लब में संवाददाताओं को सुनाई। उसे भीम आर्मी डिफेंस कमेटी द्वारा दिल्ली लाया गया। यह फोरम दलितों, अल्पसंख्यकों और हाशिए पर रखे दूसरे लोगों के खिलाफ कथित अन्याय के मामलों का संज्ञान लेता है। जाकिर ने कहा कि उसे पूछताछ का हवाला देकर रात को उठा लिया गया था।
जाकिर ने बताया, ‘मैं रात को एक मदरसे से जलसा देख कर आया तभी पुलिस ने पूछताछ का हवाला देकर मुझे उठा लिया, पुलिस अधिकारी ने कहा था कि मुझे कुछ घंटों में छोड़ दिया जाएगा। जब कि ज़ाकिर का कहना है कि किसी भावनाओं को आहत करना हमारा उद्देश्य बिलकुल नहीं था।

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