Skip to Content

महिलाओं को न्याय और अधिकार दिलाने का वादा करने वाले के दरबार में एक माँ की फ़रियाद सुनने वाला कोई नहीं

महिलाओं को न्याय और अधिकार दिलाने का वादा करने वाले के दरबार में एक माँ की फ़रियाद सुनने वाला कोई नहीं

Be First!

नई दिल्ली। जवाहर लाला नेहरू विश्वविद्यालय से ग़ायब हुए नजीब को एक साल हो गया लेकिन दिल्ली पुलिस और सीबीआई अभी तक ढूँढना तो दूर की बात है सुराग भी नहीं लगा पायी। सीधा सरल और व्यवहार कुशल नजीब की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। कन्हैया के आंदोलन के समय अचानक एक दिन जेएनयू के हॉस्टल से वह गायब हो गया। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है की, जेएनयू कैम्पस से कोई गायब हो गया और पुलिस उसका पता नहीं लगा पायी।

छः माह तक दिल्ली पुलिस ने जाँच किया कोई सुराग नहीं निकल पाया उसके बाद अदालत के आदेश पर मामला देश की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी सीबीआई को मिला लेकिन कल एक वर्ष पूरा हो गया और सीबीआई भी हाथ -हाथ धरे बैठी रही। एक साल पूरा होने और जाँच एजेंसियों के नकारात्मक रवैय्या से निराश नजीब की माँ और उसके दोस्तों ने 13 अक्टूबर को सीबीआई मुख्यालय पर धरना दिया और वह धरना दिन में दो बजे से शुरू हो कर दूसरे दिन शाम के छः बजे तक चला। 14 अक्टूबर को दिन में एक बजे नजीब की माँ को सीबीआई ऑफिस में बुलाया गया और जाँच के विषय में कुछ जानकारी देने के बजाये शाम के चार बजे तक उल्टा इनसे ही पूछ -ताछ किया गया। सीबीआई के डीआईजी ने कहा है कि वह सोमवार को अदालत में अपनी जाँच रिपोर्ट सौंपेंगे।

बड़ी संख्या में जेएनयू, जामिया और अलीगढ के छात्रों के अलावा समाजसेवी और पत्रकार इस आंदोलन में शामिल हैं जो नजीब की माँ की एक आवाज़ पर कहीं भी कभी भी पहुँच जाते है। वही लोग सीबीआई मुख्यालय पर मौजूद रहे।
शाम को वृंदा करात और शरद यादव के पहुँचने की उम्मीद थी लेकिन वृंदा करात नहीं पहुंच पायी। शारद यादव छः बजे धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने ने दिल्ली पुलिस और सीबीआई की कार्यप्रणाली पर दुःख व्यक्त किया और नजीब की माँ को भरोसा दिया कि वह उनकी आवाज़ सदन में उठाएंगे और केंद्र सरकार से जल्द से जल्द नजीब को ढूंढने की मांग करेंगे।

नजीब की माँ ने दिल्ली पुलिस और सीबीआई की जाँच पर शंका व्यक्त किया है उन्होंने कहा कि मुझे शक हो रहा है कि मेरे बेटे के गायब होने के पीछे सरकार और संघ की साजिश हो सकती है। नजीब की माँ ने कहा कि हमें कोई राजनीती नहीं करनी है अगर मेरा बेटा मुझे मिल जाता है तो मैं उसे लेकर अपने गांव चली जाउंगी और फिर कभी दिल्ली नहीं आउंगी।

Previous
Next

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*