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JNUनजीब: बिलाप करती माँ, लाठी भांजती पुलिस और अठ्ठहास करता प्रधान सेवक

JNUनजीब: बिलाप करती माँ, लाठी भांजती पुलिस और अठ्ठहास करता प्रधान सेवक

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नई दिल्ली। एक साल से दिल्ली के जेनएयू से गायब छात्र नजीब की जाँच कर रही सीबीआई आज हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान खाली हाथ पहुंची। कोर्ट ने सीबीआई की कार्यशैली पर चिंता व्यक्त किया और फटकार लगाते हुए जल्द से जल्द जाँच रिपोर्ट को कोर्ट में जमा करने के आदेश दिए। सीबीआई के निराशाजनक कार्य से क्षुब्ध नजीब की माँ और उनके समर्थकों ने दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर गांधीवादी ढंग से धरना दिया और सीबीआई की कार्यप्रणाली पर दुःख व्यक्त किया। नजीब की माँ अब कोर्ट से मांग कर ह्री हैं कि सीबीआई निष्पक्ष जाँच नहीं कर रही है इस लिए इस मामले को एसआईटी को दे दिया जाये।

कोर्ट के बाहर बिलाप करती बेसहारा माँ सिर्फ यही मांग कर रही है कि मुझे मेरा बेटे दे दो ! मैं अपने गांव चली जाउंगी, लेकिन दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सीबीआई सभी मूकदर्शक बने हुए हैं।
नेताओं की भैंस ढूंढने वाली दिल्ली पुलिस दिल्ली के जाने -माने विश्वविद्यालय जेएनयू से गायब नौजवान नजीब को नहीं ढूंढ पायी और न ही अभी तक कोई सुराग मिला। जबकि दिल्ली पुलिस देश की सबसे स्मार्ट पुलिस मानी जाती है।
सोमवार को हाईकोर्ट के बाहर धरना स्थल पर मौजूद दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर सोलंकी ने महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया, और नजीब की माँ के साथ भी बदतमीजी किया गया। घंटों पुलिस और प्रदर्शनकरियों के बीच चली जद्दो जहद के बाद पुलिस ने नजीब की माँ सहित सभी को गिरफ्तार कर लिया। खबर लिखे जाने तक नजीब की माँ और समर्थक पुलिस हिरासत में थे।

सोशल मिडिया पर हो रही है निंदा
सोशल मिडिया पर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। इलेक्ट्रानिक मिडिया इस मामले को भले ही न कर करे लेकिन सोशल मिडिया पर यह मामला छाया हुआ है और लाइव कवरेज किया जा रहा है जिसे लाखों लोग देख रहे हैं। नजीब की माँ के साथ किये जा रहे बर्ताव की निंदा हो रही है और मोदी सरकार पर आरोप लग रहे हैं की सरकार आरोपियों का बचाव कर रही है। जबकि जेएनयू के छात्रों का कहना है कि पुलिस आरोपियों का बचाव कर रही है। कभी भी दिल्ली पुलिस ने आरोपी छात्रों से पूछ ताछ नहीं किया नहीं तो अब तक सारे मामले का खुलासा हो चूका होता। अब यह सब किसके दबाव में हो रहा है यह तो जाँच में पता चल पायेगा, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या मोदी की सरकार में निष्पक्ष जांच सम्भव है ?

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