Skip to Content

उपचुनाव: नफ़रत की सियासत को जनता ने नकारा

उपचुनाव: नफ़रत की सियासत को जनता ने नकारा

Be First!

नई दिल्ली। देश में हुए उपचुनाव में भाजपा को मिली भारी शिकस्त ने 2019 की सियासत में बदलाव के संकेत दे दिए है। 10 विधान सभा की सीटों से मात्र एक सीट और 4 लोकसभा में से 2 सीटों पर सिमटी भाजपा के अंदर मंथन शुरू हो गया है।

2014 में भाजपा ने जो देश की जनता से वादा किया था उसे पूरा करने में विफल रही। सरकार बनने के बाद भाजपा ने विकास के बजाय गाय, गोबर और नफरत की सियासत शुरू कर दिया।

भाजपा के सहयोगी सबगठनों ने पूरे देश में हिन्दू और मुसलमान के नाम पर जो तांडव किया उसे पूरे देश ने देखा। देश के कई हिस्सों में लोंगों को नफ़रत का शिकार होना पड़ा, दलितों  और मुसलमानों को सरे राह पीट पीट कर उनकी हत्या की गई।

नोट बन्दी से क्या बदला?

नोट बन्दी के नाम पर केंद्र सरकार ने देश के गरीब और आम आदमियों  को परेशान किया। कई लोंगों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। काले धन का आज तक पता नहीं चला। देश के किसानों को नज़र अंदाज़ करके उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाया गया जिसके कारण आज देश का किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है।

2019 में होगा बदलाव

रणनीति के पंडितो  का यह मानना है कि भाजपा विकास का वादा करके देश की जनता को ठगने का कार्य किया है। जिस जनता ने 2014 में बदलाव और विकास के लिए भाजपा को वोट दिया था उन लोंगों को अब समझ आ गया कि भाजपा देश का विकास नहीं विनाश करने वाली पार्टी है। इस लिए गोरखपुर और फूलपुर से शुरू हुई भाजपा की हार कैराना तक कायम रही, इसका सीधा अर्थ यह है कि योगी सरकार से जनता का मोह भंग हो रहा है। जनता अब बदलाव चाहती है। जिसकी शुरुआत हो चुकी है।

अगर यह महागठबंधन एक साथ मिल कर लोक सभा का चुनाव लड़ेगा तो 2019 में मोदी की सरकार की वापसी नामुमकिन है।

Previous
Next

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*