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NOIDA: ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों के विरुद्ध नोयडा में चल रहा है अवैध रेत का कारोबार, प्रदूषण से ग्रामवासी परेशान

NOIDA: ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों के विरुद्ध नोयडा में चल रहा है अवैध रेत का कारोबार, प्रदूषण से ग्रामवासी परेशान

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नोयडा ब्यूरो। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की अनदेख कर के नोयडा में अवैध रेत का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। रेत के कारोबार से होने वाले प्रदूषण से ग्रामवासी परेशान है लेकिन शासन और प्रशासन को इससे कोई सरोकार नहीं है। नोयडा के सेक्टर 141 ग्राम शहदरा में रेत माफिया खुले आम अवैध रेत का कारोबार कर रहे हैं। रातों – रात इनके ठिकानों पर सैकड़ों ट्रक रेत इकठ्ठा हो जाती है, और दिन में उसमें मिलावट करके ठेकदारों और बिल्डरों को सप्लाई किया जाता है। रेत ट्रक से उतारते, मिलावट करते और लोड करते समय बहुत ज्यादा प्रदूषण होता हैजिस के कारण आस -पास रहने वाले बूढ़े और बच्चों में साँस फूलने और दमा की बीमारी फ़ैल रही है।

प्राधिकरण की ज़मीन पर चल रहा है अवैध कारोबार

नोयडा के सेक्टर 141 ग्राम शहदरा में प्राधिकरण की ज़मीन पर रेत माफियाओं का कब्ज़ा है। सरकारी ज़मीन पर चल रहे अवैध रेत के कारोबार से जहाँ रेत माफिया करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं वहीँ प्राधिकरण और पुलिस को उनका हिस्सा मिल रहा है! थाना प्रभारी सूरजपुर और प्राधिकरण के जूनियर इंजीनियर नरोत्तम सिंह, प्राधिकरण के लेखपाल मनोज सिंघल, एसएसपी, आईजी मेरठ और डीएम गौतमबुद्ध नगर को उपरोक्त विषय से अवगत कराया गया लेकिन किसी ने भी कार्रवाई करना उचित नहीं समझा, जिसके कारण अनुमान लगाया जा रहा है कि सभी लोग इस अवैध कारोबार में लिप्त हैं!

भ्र्ष्टाचार बन रहा है विकास में रोड़ा !

मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ के लाख प्रयासों के बाद भी भ्र्ष्टाचार में कोई कमी नहीं आ रही है जिसके कारण होने वाले विकास कार्य रुके हुए है। सरकारी ज़मीनों पर कब्जे हो रहे हैं। अवैध कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। जगह -जगह मिक्सिंग प्लांट और रेत का कारोबार बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है, जिस से प्रशासन और पुलिस को मोटा हिस्सा मिल रहा है! मिलावटी रेत से बन रही बहुमंजिली इमारतें किसी दिन जानलेवा साबित होंगी और इसके जिम्मेदार रेत के कारोबारी ही नहीं वह सभी अधिकारी और कर्मचारी होंगें जो अपने ईमान का सौदा करके इस कार्य को बढ़ावा दे रहे है या जिनके सहयोग से यह कार्य चल रहा है।

रेत आता कहाँ से है ?

जब नोयडा में खनन का सरकारी टेंडर नहीं हुआ है तो यह रेत कहाँ से आ रहा है? यह भी जाँच का विषय है लेकिन जब जाँच अधिकारी स्वयं अवैध कार्यों में लिप्त हैं तो कौन जाच करेगा और कौन गिरफ्तार करेगा ? यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

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