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आजमगढ़: मौलाना रशादी की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान विरोधियों ने रचा राजनैतिक षड्यंत्र

आजमगढ़: मौलाना रशादी की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान विरोधियों ने रचा राजनैतिक षड्यंत्र

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आजमगढ़। राष्ट्रीय उलेमा काउन्सिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना रशादी की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान कुछ तथाकथित नेताओं ने मिडिया में जगह पाने के लिए उनके ऊपर शर्मनांक आरोप लगाते हुए मुकदद्मा दर्ज करवाया है। यह वह लोग हैं जिन्हे क्षेत्रवासियों ने नकार दिया है और इनके पास क्षेत्र में कहीं बैठने का भी स्थान नहीं बचा है।
अपनी कौम की खिदमत में रात -दिन मुहल्ले से शहरों तक सफर करने वाले नेक इंसान पर इस तरह का शर्मनांक आरोप लगाते हुए इन शैतानों को शर्म नहीं आयी -यह कहना है आजमगढ़ के एक आम नागरिक वलीउल्लाह का जो मौलाना को एक नेक और कौम परस्त नेता के रूप में जानते हैं।

उलेमा काउन्सिल से पदाधिकारी, मोहम्मद नसीम का कहना है कि :
दोस्तों मिल्ली क़यादत और सियासत को खत्म करने, क़ौम के इत्तेहाद और मिल्लत के एतेमाद को कमज़ोर करने के लिए अक्सर हमारे बीच से ही मीर सादिक़ और मीर जाफर खड़े किए जाते रहे हैं, तारीख गवाह है इस बात की। आज फिर ऐसी ही कोशिश की गई है आपकी क़यादत को कमज़ोर करने के लिए और इस बार इन मुनाफ़िक़ों ने कमज़र्फ़ी और नीचता की सारी हदें पार करते हुए हम सब के हर दिल अज़ीज़ काएद मौलाना आमिर रशादी, क़ौमी सदर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।

ये मुक़दमा किसी ग़ैर ने नही बल्कि MIM का नेता हामिद संजरी ने दर्ज कराया है। मौलाना पे दर्ज करवाया गया दहेज हत्या का मुकदमा उन्हें बदनाम करने के लिए विरोधियों द्वारा रचा गया राजनैतिक षड़यंत्र है। मौलाना के बड़े भाई डॉ अम्मार साहब की बहु का इंतेक़ाल लगभग 2 महीना पहले एक हादसे में हुआ था और उसकी जनाज़े की नमाज़ में पूरे शहर के साथ ही लड़की का पूरा खानदान शामिल था और जनाज़े की नमाज़ खुद लड़की के भाई ने पढ़ाई थी। इंतेक़ाल का रिक्शा से शहर भर में एलान भी हुआ, लड़की को ग़ुस्ल देने में भी लड़की के घर वाले (भाभी) शामिल थीं, भईयों ने मरहूमा की लाश को देखा भी था और तसवीरें भी ली थीं।

तब किसी को कोई शिकायत नही थी और नाही किसी ने कोई मुक़दमे या पोस्टमार्टम की बात की। फिर अचानक 2 महीने बाद लड़की के बहनोई हामिद संजरी ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। सवाल ये है कि लड़की के वालिद और आधा दर्जन सगे भाई होने के बावजूद मुक़दमा हामिद ने अपने नाम से क्यों दर्ज कराया? अगर क़त्ल का शक था तो अबतक खामोश क्यों थे? मरहूमा की शादी को 9 साल से ऊपर हो गए, 3 मासूम बच्चे हैं क्या इतने सालों बाद कोई जहेज़ के लिए क़त्ल करेगा? हामिद संजरपुर से आकर आज़मगढ़ में मुक़दमा दर्ज कराते हैं अपनी साली की मौत का जबकि लड़की का सबसे बड़ा भाई खुद शहर में रहता है। ये वही हामिद हैं जो राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल में थे और जिन्हें लगभग 2-3 साल पहले पार्टी से निकाल दिया गया था और इस वक़्त वो मजलिस इत्तेहादुल मुस्लेमीन MIM की प्रदेश कमेटी में है और आप सब जानते हैं कि निकाले जाने के बाद से लगातार हामिद मौलाना रशादी साहब का और पार्टी की मुख़ालफ़त/बुराई सड़क से लेकर फेसबुक पे करते रहै हैं।

पूरा शहर जानता है कि मौलाना आमिर रशादी साहब और उनके बड़े भाई डॉ अम्मार साहब पिछले 25 साल से भी ज़्यादा वक़्त से अलग-अलग अपने परिवार के साथ रहते हैं। पर एक खानदान के होने के नाते एक दूसरे के ग़म खुशी में शामिल रहते हैं, ऐसे में क्या सिर्फ जनाज़े में शामिल होने से और दरवाज़े पे बैठ जाने से कोई हत्यारोपी हो जाएगा? इन हालात में ये साफ साबित होता है कि सियासी अदावत और खलिश में हामिद ने ये मुक़दमा दर्ज कराया है ताकि मौलाना और उनके खानदान को बदनाम और परेशान किया जा सके और राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल को कमज़ोर किया जा सके ताकि मिल्लत और क़ौम की एक मजबूत आवाज़ दब जाए। पर ये मीर जाफर ये नही जानते कि जिसे अल्लाह रखे उसे कौन चखे। वक़्त का तकाजा है कि हम अपने क़यादत के साथ शाना ब शाना खड़े रहें और इन मुनाफ़िक़ों का असली चेहरा सबके सामने लाएं। हमे पूरा यकीन है कि बहुत जल्द पुलिस जाँच में सारी बात सामने आएगी और सच सबके सामने होगा।

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