Skip to Content

अपमान: शहीद हेमंत करकरे के अपमान पर बाबा रामदेव और मोहन भागवत की चुप्पी क्यों?

अपमान: शहीद हेमंत करकरे के अपमान पर बाबा रामदेव और मोहन भागवत की चुप्पी क्यों?

Be First!

नई दिल्ली। देश भर में राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बांटने वाले भाजपा और आरएसएस के सहयोगी सन्गठन प्रज्ञा ठाकुर के बयान पर चुप क्यों हैं? बम ब्लास्ट की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा शहीद करके को रावण कहने पर देश के राष्ट्रवादियों को सांप सूंघ गया। बाबा रामदेव और मोहनभगवत जैसे लोग चुप्पी साधे हुए हैं और मीडिया चिरनिद्रा में सो रहा है।

भाजपा के इस आतकंवादी उम्मीदवार द्वारा शहीद करकरे के बयान से जहां शहीद का परिवार दुखी है वहीं देश की जनता राष्ट्रवादियों की चुप्पी पर अचंभित है।

अगर यही बयान किसी असदुद्दीन ओवैसी या आज़म खान ने दिया होता तो शायद अब तक यह तथाकथित राष्ट्रवादियों के सन्गठन उनको आतंकवादी साबित कर चुके होते।

अगर किसी आतंकवाद के आरोपी को कांग्रेस या किसी अन्य दल ने टिकिट दिया होता तो यह आरएसएस और भाजपा के लोग अब तक अपने दलाल मीडिया के साथ मिल कर उस पार्टी को आतंकवादियों की पार्टी घोषित कर दिया होता लेकिन जब भाजपा के उम्मीदवार ने देश के शहीद का अपमान किया तो उस बयान पर किसी राष्ट्रवादी की कोई प्रतिक्रिया नही आयी।

इससे यह स्पष्ट होता है कि यह लोग राष्ट्रवादी नहीं बल्कि अवसरवादी लोग हैं। जो देश को बांट कर, राष्ट्रवाद और राष्ट्रविरोधी की बहस करके देश का ध्यान विकास, रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय से भटका कर सत्ता हासिल करना चाहते हैं।
अगर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर अपने श्राप से देश के शहीद को मार सकती है,तो आतंकवादियों को क्यों नहीं ? शहीद का अपमान करने वाली और आतंकवादियों का साथ देने वाली प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा देश के सबसे बड़े सदन में पहुंचा कर उसे और शक्तिशाली बनाने का प्रयास कर रही है।

आतंकवाद के आरोपी को टिकिट देकर चुनाव लड़वाने की परंपरा भाजपा ने शुरू कर दिया है। अब यह परंपरा आगे चलेगी और अगर यह चुनाव जीत जाती है तो देश में समाजसेवा और विकास के मुद्दों पर कार्य करके सत्ता में पहुंचने वाले महत्वहीन हो जाएंगे और युवा कट्टरवाद और आतंकवाद का रास्ता अख़्तियार कर सकते हैं।

चुनाव में नकली राष्ट्रवाद और राष्ट्र सुरक्षा और एकता के लिए इस तरह के उम्मीदवारों की जमानत जब्त करके इन को बेनकाब करना आवश्यक है। नहीं तो देश की राजनीती के चरित्र पर सवाल उठने लग जाएगा और सियासत का स्वरूप और भयावह हो जाएगा। जिससे जनता भयभीत तो होगी ही, लोग नफरत भी करने लग जाएंगे। राष्ट्र की शांति व्यवस्था को खतरा उतपन्न हो सकता है।
लेेखक: मोहम्मद अय्यूब, Email: editorgulistan@gmail.com

Previous
Next

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*