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सवाल: गो रक्षा के नाम पर इंसानों को नोचने वाले, क्या अब बेटियों की आबरू नोचने वालों के साथ खड़े हैं?

सवाल: गो रक्षा के नाम पर इंसानों को नोचने वाले, क्या अब बेटियों की आबरू नोचने वालों के साथ खड़े हैं?

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नई दिल्ली। बिहार में 34 और यूपी में 28 मासूम बेटियां दरिंदों की दरिन्दगी का शिकार हो गईं लेकिन न मीडिया का मुद्दा बन पायीं और न ही नींद से जगा पायीं देश की जनता को। हिन्दू मुसलमान के खेल में उलझे देश भक्तों यह बेटियां हमारी हैं, भारतीय हैं। कहाँ मर गया तुम्हारा ज़मीर। दिल्ली में कैंडल मार्च में मोमबत्तियां लेकर घूमने वाले कहाँ मर गए। क्या तुम्हारा ज़मीर इस लिए नहीं जाग रहा है क्योंकि उन बेटियों का कोई मां बाप नहीं है।

पत्रकारों की लेखनी में जंग लग गया? सवा सौ करोड़ की आबादी में कुछ दरिंदें बेसहारा बेटियों की आबरू से खेलते रहे और सुरक्षा के ठेकेदार दलाली में मस्त। सिस्टम दोगला हो गया। मर गयी उनकी आंखों की शर्म और हया जो समाज में समानता, सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं।

देश को हिन्दू और मुसलमान में बांटने वाले बताएं यह बेटियां किस धर्म हैं?
अगर आज हमने इन दरिंदों और नेताओं को बेनकाब नहीं किया तो कल दुनियां में मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगें।

बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ का खोखला नारा लगाने वाले अपनी बेटियों से कैसे आंख मिलाते होंगे?
बिहार की भाजपा सरकार ने दरिंदें को वातानुकूलित अस्पताल में पनाह दिया हुआ है। गाय की रक्षा के नाम पर  इंसानों को नोचने वाले आज बेटियों की आबरू नोचने वालों के साथ खड़े है? यही है तुम्हारा असली चेहरा!

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