Skip to Content

एफआरडीआइ विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल सकती है सरकार

एफआरडीआइ विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल सकती है सरकार

Be First!
by December 20, 2017 व्यापर
नई दिल्ली। बैंकों में जमा बचत राशि को लेकर फैल रही अफवाहों के मद्देनजर सरकार ‘फाइनेंशियल रिजोल्यूशन एंड डिपॉजिट बिल’ को ठंडे बस्ते में डाल सकती है। माना जा रहा है कि केंद्र अब यह विधेयक संसद के बजट सत्र में शायद पेश न करे। इसकी वजह दरअसल यह है कि संसद की जो समिति इस विधेयक पर विचार कर रही है उसका कार्यकाल अब बढ़ा दिया गया है।

इस विधेयक के प्रावधानों को लेकर हाल में काफी विवाद रहा है। सरकार को इसके बारे में फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। केंद्र ने विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार का संकेत भी दिया है।

हालांकि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सोमवार को लोकसभा को सूचित किया कि एफआरडीआई विधेयक के प्रावधानों को परख रही संयुक्त समिति का कार्यकाल बढ़ाकर आगामी बजट सत्र के अंतिम दिन तक कर दिया गया है। इसका मतलब है कि समिति को बजट सत्र के अंतिम दिन अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इस कदम के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद यह विधेयक अब आगामी बजट सत्र में पेश न किया जाए। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा गया है। पहले संयुक्त समिति को 15 दिसंबर तक रिपोर्ट पेश करनी थी। इसलिए इस बात के आसार थे कि शायद सरकार इस विधेयक को संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में ही सदन में चर्चा के लिए रखे।

दरअसल यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब हाल में इस विधेयक के प्रावधानों को लेकर अलग-अलग वर्गो से सवाल उठाए गए हैं। केंद्र की ओर से अलग-अलग स्तर पर इस विधेयक के बारे में आशंकाओं को दूर करने की कोशिश भी की गई है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी इस विधेयक के बारे में फैलाई जा रही भ्रांतियों के बारे में लोगों को आगाह किया है। जेटली ने कहा था कि सरकार इस विधेयक के प्रावधानों में बदलाव करने के लिए भी तैयार है। सरकार ने यह विधेयक पिछले साल लोकसभा में पेश किया था।

यह विधेयक बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों के दिवालियेपन के मामले सुलझाने के लिए लाया गया है। हालांकि इसके कुछ प्रावधानों को लेकर बैंक जमाकर्ताओं ने चिंता प्रकट की है। असल में इस विधेयक में रिजर्व बैंक की सब्सिडियरी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन को खत्म करने का प्रावधान है। डीआइसीजीसी ही वह संस्था है जो किसी बैंक के फेल होने पर उसमें जमा ग्राहक की एक लाख रुपये तक की राशि के भुगतान का आश्वासन देता है। ऐसे में इस विधेयक के प्रावधानों में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जमाकर्ताओं की बचत को किस प्रकार से सुरक्षित रखा जाएगा।

Previous
Next

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*