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हार्टअटैक से मौत के बाद उसकी प्रेमिका ने फांसी लगा ली

हार्टअटैक से मौत के बाद उसकी प्रेमिका ने फांसी लगा ली

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लखनऊ । प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कल एक युवक की हार्ट अटैक से मौत के बाद उसकी प्रेमिका ने भी जान दे दी। प्रेमिका उस युवक के घर पर उसको देखने आई और युवक के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी।

लखनऊ के राजाजीपुरम के सी ब्लॉक में कल युवक की हार्टअटैक से मौत के बाद उसकी प्रेमिका इतनी आहत हुई कि उसने युवक के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। दोनों के परिवारों में शादी की बातचीत चल रही थी। युवती ने अपना दर्द सुसाइड नोट में बयां किया है। उसने प्रेमी को संबोधित करते हुए लिखा-शुभम नहीं रहे तो मेरे जीने की कोई वजह नहीं है.. मैं शुभम के बिना एक पल नहीं रह सकती। मैं जीना नहीं चाहती। सॉरी, आइ लव यू शुभम।

शुभम के पिता बलराम शुक्ला के मुताबिक अभिनव उर्फ शुभम (25) इंटर में पढ़ रहा था। वह सेल्समैन का भी काम करता था। बीए की छात्र पारा निवासी वंदना सिंह (23) की शुभम से शादी की बातचीत चल रही थी। वह तीन वर्ष पहले शुभम के घर के पास ही परिवार के साथ किराए के मकान में रहती थी।

कल सुबह शुभम की अचानक हार्टअटैक से मौत हो गई। वंदना शुभम के घर पहुंची। परिवार वाले शव के पास गमगीन बैठे थे। वंदना ऊपर शुभम के कमरे में गई और दुपट्टे के सहारे पंखे से फांसी लगा ली। घरवालों ने दरवाजा तोड़कर वंदना को नजदीक के अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मचा है।

बुझ गया घर का इकलौता चिराग

अभिनव शुक्ला उर्फ शुभम की हार्टअटैक से मौत के साथ घर का इकलौता चिराग बुझ गया। जिस मां-बाप ने बुढ़ापे में सहारे का अरमान संजो रखा था, बेटे की मौत के बाद उनकी सारी खुशियां आंसुओं में बह गईं। जिस घर में शहनाई बजने के सपने देखे जा रहे हों, बहू आने वाली हो, वहीं जवान बेटे और आने वाली बहू की लाशें आंगन में पड़ी हों तो मां-बाप का क्या हाल होगा, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

शुभम की मौत ने बुजुर्ग पिता बलराम शुक्ला व मां पूनम शुक्ला को तोड़कर रख दिया है। बहन प्रिंसी का भी बुरा हाल है। बलराम शुक्ला ने रूंधे गले से बताया कि बड़े बेटे मनीष की वर्ष 2012 में अयोध्या में सरयू नदी में नहाते समय डूबकर मौत हो गई थी, उसका शव तक बरामद नहीं हो सका। मनीष की शादी भी हो गई थी, एक बेटा भी था, जिसका नाम प्रथम रखा गया था। बकौल बलराम मनीष की मौत के बाद पत्नी अलका का दूसरा विवाह कर दिया गया, वह बेटे को लेकर चली गई थी। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि अचानक शुभम की मौत ने उन्हें झकझोर दिया। बलराम अपने आंसू पोंछते हुए कहते हैं अब तो सबकुछ खत्म हो गया, बुढ़ापे का अंतिम सहारा था शुभम, वह भी नहीं रहा।

सीओ बाजारखाला अनिल कुमार यादव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। परिवार के लोगों ने शुभम की स्वाभाविक मौत बताकर अभिनव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

डोली की जगह घर से निकलेगी अर्थी

वंदना के घरवालों ने भी उसकी शादी के सपने देखे थे, लेकिन पलभर में सारे सपने टूट गए। कल देर शाम सात बजे के करीब पोस्टमार्टम के बाद वंदना का शव घरवालों के सुपुर्द कर दिया गया। जिस घर से डोली उठनी थी आज वहां से अर्थी उठेगी। मूलरूप से हरदोई निवासी अरविंद सिंह की बेटी वंदना पढ़ाई लिखाई के साथ रोजमर्रा के अन्य कामों में भी होशियार थी। वंदना अपनी बड़ी बहन नंदनी के साथ पारा में थाने के करीब ही रहती थी।

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