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मंत्री बदलने से नहीं, विचारधारा बदलने से बदलेगा देश

मंत्री बदलने से नहीं, विचारधारा बदलने से बदलेगा देश

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जो कट्टर पन्थी नौकरशाह सेवा मुक्त होते ही चाटुकारिता से सत्ताधारी पार्टी में पुनः शक्ति पाने के लिए मंत्री बन रहे हैं उनकी मानसिकता और विचारधारा का आप अंदाजा लगा सकते हैं। ऐसे लोग अपने पद पर रहते हुए कभी भी धर्मनिरपेक्ष नहीं रहे। बल्कि पद पर रहते हुए इन्होंने संघी विचार धारा को आगे बढ़ाने और सरकारी मशीनरी में बैठ कर दलितों और मुसलमानों को आगे बढ़ने से रोकने का कार्य किया है जिसका आज इन्हें पुरस्कार मिल रहा है। जनरल वीके सिंह, आर के सिंह और सत्यपाल सिंह जैसे लोंगों के मंत्री बनने से देश का विकास नहीं होगा। किसी भी देश के विकास के लिए सामाजिक संतुलन का संतुलित होना आवश्यक है। असंतुलित समाज में विकास की बात करना बेईमानी होगा। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि भाजपा चाहे जितनी जुगाड़ कर ले, 2019 में भाजपा को 2014 की अपेक्षा कम सीटें मिलेंगीं। जिसका अंदेशा पार्टी और संघ दोनों को है। यह मंत्रालय में रद्दोबदल उसी का नतीजा है। बीजेपी के सामाजिक और ज़मीनी नेताओं को हासिये पर डाल कर संघी विचार धारा पार्टी पर काबिज़ है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करके संघ के लोंगों को तरजीह दिया जा रहा जिसके कारण भाजपा के ज्यादातर नेता अलग थलग पड़े हैं। भाजपा के एक खेमें में नाराजगी और गुस्सा है लेकिन मुखर होकर विरोध करने का किसी में साहस नहीं है जिसके कारण संघ नित नए चेहरों को मैदान में उतार रहा है।
नोटबंदी, काला धन, बेरोजगारी और भ्र्ष्टाचार जैसे मुद्दों पर फेल मोदी ने धन, बल और छल से अपने प्रतिद्वंदी नीतीश को तो धराशाही कर दिया लेकिन राजनीति के चाणक्य लालू यादव ने सबकी नींद हराम कर रखा है। भले ही सब कुछ सामान्य दिख रहा हो लेकिन अंदर कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है।

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