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Save Water: जल संकट से निपटने की तैयारी कब होगी?

Save Water: जल संकट से निपटने की तैयारी कब होगी?

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लगातार गिरता जल स्तर चिंता का विषय है, लेकिन आधुनिक युग की ज़िन्दगी इतनी व्यस्त हो गयी है, कि किसी को इस विषय में सोचने का समय ही नहीं है। चाहे सरकारें हो या सरकारी मशीनरी या फिर आम नागरिक। शहरी लोंगों को निगम या कोई एजेंसी जल उपलव्ध करा रही है। जब कभी सप्लाई बंद होती है तो भगदड़ मचती है, कोई टैंकर मंगवाता है, तो कोई पानी की बोतल से गुजारा करता है। ज्यादातर नौकरी पेशा लोंगों को पैसे की कमी नही है इस लिए सोचते हैं हर वस्तु पैसे से मिल जाएगी।

ठीक यही स्थिति अब गांवों में देखने को मिल रही है जहां पर पानी सप्लाई करने वाली कोई संस्था नहीं है इस लिए लोग हैंडपम्प से पानी निकालते हैं। जहां पहले 40 फ़ीट पर पानी मिलता था वहां पर अब 1जल स्तर 50 से 200 फ़ीट नीचे चला गया है। इस लिए जिनके नलकों में अब पानी नही आ रहा है वह लोग समर्सिबल से 150 से 200 फ़ीट नीचे से पानी खिंच कर अपना काम चला रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में भी अब लोग आर्थिक रूप से मजबूत हो गए है। इस लिए यह सोचने पर समय नहीं गवाना चाहते कि आखिर जलस्तर नीचे क्यों जा रहा है?पैसे से अपना काम चल रहा है तो सोचने की क्या आवश्यकता है?


बाग, बगीचों को काट कर खेत और मकान बनाये जा रहे हैं। तालाबों और पोखरों पर कब्जा करके उनेह पाटा जा रहा है। अब पर्यावरण के विषय में न बूढ़े सोच रहे हैं और न ही नौजवान। राजनैतिक दलों को सिर्फ सत्ता हथियाने की चिंता रहती है और सत्ता मिल जाने पर उसे बचाने में पांच साल निकल जाता है। जनता और उनके भविष्य के विषय में सोचने का समय नेताओं और सरकारों के पास नहीं है। आज की सियासत हिन्दू , मुसलमान, गाय, गोबर, मंदिर और मस्जिद तक सिमट कर रह गयी है।

अभी कुछ दिनों पहले मैं उत्तर प्रदेश के अपने गांव आज़मगढ़ गया था, तो पता चला कि गांव के ज्यादातर हैंडपम्प में पानी नहीं है, मोटर से भी पानी नहीं मिल रहा है। मैंने देखा कि कुछ लोंगों के दरवाजे के बाहर पाइप फैला हुआ है, और पानी से बालक खेल रहे है। पानी सड़क पर फैल रहा है। पूछने पर पता चला कि उनके यहां समर्सिबल लग गया है। इस लिए उनके घर पानी की कोई परेशानी नही है। मैंने कहा कि गांव में जब ज्यादातर नल सुख गए हैं, तब भी आप लोंगों को पानी के दुरूपयोग और संचय की चिंता नहीं है। जवाब मिला कि क्या अकेले हमारे बचाने सबके घर पानी आ जायेगा, या फिर हमारे बर्बाद करने से पाताल लोक सूख जाएगा।

बहुत कोशिश किया कि लोंगों को एकत्र करके जागरूक करूँ लेकिन न नौजवान समझने को तैयार है और न ही बूढ़े।
मैं तो उस समय की कल्पना से कांप जाता हूँ कि जब धरातल का पानी सुख जायेगा। धरती जल बिहीन हो जायेगी, और इंसान मछलियों की तरह से तड़प-तड़प कर मर रहा होगा। न दौलत काम आएगी और न ही शक्ति। इस लिए समय रहते सावधान हो जाओ साथियों, और जल संचय के संसाधनों का इंतज़ाम करो। अबकी बार बारिश से पहले कहीं भी दस पौधे लगाने का संकल्प लो और जहां भी तालाब और पोखरे पर कब्ज़ा हो रहा हो उसे तत्काल रुकवाओ जिससे कि दुनियां को इस संकट से बचाया जा सके। by: kamruddin siddiqui, E-mail: editorgulistan@gmail.com

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